जांजगीर-चांपा. नवागढ़ ब्लॉक के ग्राम पंचायत कन्हाईबन्द में खुल रहे नये कोल डिपो संचालन को लेकर एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां कोल डिपो संचालक और राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों की कथित साठगांठ ने प्रशासनिक व्यवस्था की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोप है कि नियम विरुद्ध गतिविधियों को छिपाने के लिए एक पटवारी पर दबाव बनाया गया और उसके मूल प्रतिवेदन से छेड़छाड़ कर कलेक्टर को गुमराह किया गया. प्रतिवेदन पर ग्राम पंचायत की अनापत्ति को छिपाया गया. राजस्व विभाग की गलत प्रतिवेदन को सही मान कर खनिज विभाग भी बिना मौका निरीक्षण कर कोल डिपो को अनुमति से दिया.
आपको बता दें कि, नवागढ़ ब्लॉक के कन्हाईबंद ग्राम पंचायत से अनुमति लिए मेसर्स टर्टल सर्विसेस प्रोपाइटर शशांक कुमार सिंह निवासी रामा ग्रीन सरकंडा बिलासपुर द्वारा ग्राम पंचायत कन्हाईबंद में खसरा नंबर 660 रकबा 0.717 हेक्टेयर में खनिज क्षमता 19 हजार एमटी, एवं 1 हजार एमटी अस्थाई अनुज्ञा पत्र के लिए मांग पत्र कोल भंडारण के लिए दिया गया था. उक्त भूमि में कोल भंडारण के लिए नीरज सिंह पिता सीताराम द्वारा अनापत्ति पत्र की मांग की गई थी. जिसे ग्राम पंचायत ने खारिज कर दिया गया है.
सूत्रों के अनुसार, पटवारी द्वारा स्थल निरीक्षण के बाद जो वास्तविक रिपोर्ट तैयार की गई थी, उसमें कोल डिपो से जुड़ी कई अनियमितताओं का उल्लेख था. लेकिन बाद में उक्त प्रतिवेदन में बदलाव कर तथ्यों को कमजोर किया गया. यह सब कथित तौर पर कोल डिपो संचालक और राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से किया गया.
मामला उजागर होने के बाद खनिज विभाग द्वारा जारी आदेश भी अब संदेह के दायरे में आ गया है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह आदेश वास्तविक तथ्यों के आधार पर जारी किया गया या फिर बदले हुए प्रतिवेदन को आधार बनाकर कार्रवाई को प्रभावित किया गया.
विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि जांच के दौरान दस्तावेजों में विरोधाभास पाए गए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मूल रिपोर्ट और प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में जमीन-आसमान का अंतर है. यदि यह साबित होता है कि कलेक्टर को जानबूझकर गुमराह किया गया, यह केवल विभागीय लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर प्रशासनिक षड्यंत्र की श्रेणी में आएगा.
स्थानीय स्तर पर इस पूरे प्रकरण को लेकर भारी रोष है. लोगों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष नहीं हुई, तो ऐसे मामलों में भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण मिलता रहेगा. वहीं खनिज विभाग की भूमिका को लेकर भी सवाल तेज हो गए हैं कि आखिर जांच के नाम पर किसे बचाया जा रहा है.
अब सबकी निगाहें उच्चस्तरीय जांच पर टिकी हैं. यदि निष्पक्ष पड़ताल हुई, तो कई चेहरे बेनकाब हो सकते हैं और जिले के राजस्व-खनिज तंत्र में बड़ा भूचाल आना तय माना जा रहा है.
