बलरामपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति VSK एप के माध्यम से दर्ज किए जाने के निर्णय के खिलाफ छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन बलरामपुर ने मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार 1 जनवरी 2026 को जिला अध्यक्ष पवन सिंह के नेतृत्व में संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने जिला शिक्षा अधिकारी बलरामपुर से मुलाकात कर इस व्यवस्था पर कड़ा विरोध दर्ज कराया और ज्ञापन सौंपा।
जिला अध्यक्ष पवन सिंह ने कहा कि शिक्षकों का मोबाइल फोन उनकी निजी संपत्ति है और उससे ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराना न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि शिक्षकों की निजता का भी गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने बताया कि विभागीय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कार्य करने के दौरान शिक्षकों की कई संवेदनशील जानकारियां, जैसे कर्मचारी कोड, यू-डायस कोड, मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी, साइबर ठगों तक पहुंच चुकी हैं। इसके चलते जिले में कई शिक्षक साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।
उन्होंने बताया कि संगठन द्वारा अब तक 34 शिक्षकों से जुड़े साइबर ठगी के मामलों की जानकारी संकलित कर ज्ञापन के माध्यम से जिला शिक्षा अधिकारी को सौंप दी गई है। इसके अलावा जिले में ऐसे कई और प्रकरण हो सकते हैं, जिनकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में ऑनलाइन उपस्थिति के लिए किसी एप्लीकेशन को अनिवार्य करना शिक्षकों की निजी जानकारी को जोखिम में डालने जैसा है, जिससे साइबर अपराधियों को ठगी का अवसर मिल सकता है।
जिला अध्यक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि शासन द्वारा इस व्यवस्था को लागू करने से पहले न तो किसी प्रकार की साइबर सुरक्षा की गारंटी दी गई है, न ही डाटा संरक्षण की ठोस तकनीक या नुकसान की स्थिति में मुआवजे की कोई स्पष्ट नीति बनाई गई है। उन्होंने कहा कि यदि शासन ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली लागू करना चाहता है, तो इसके लिए आवश्यक डिवाइस स्वयं उपलब्ध कराए, क्योंकि शिक्षक अपनी निजी संपत्ति का उपयोग शासकीय कार्य के लिए करने को बाध्य नहीं किए जा सकते।
इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल में श्याम गुप्ता, विनय गुप्ता, विनोद कुर्रे, रामपथ यादव और दिलीप गुप्ता उपस्थित रहे।
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