राजनांदगांव. छत्तीसगढ़ की बेटियां आज खेल के मैदान में नए कीर्तिमान रच रही हैं और राजनांदगांव जिले की रेवाडिह वार्ड की अदिति कोडापे इसका जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई हैं. सीमित संसाधनों और संघर्ष भरे पारिवारिक हालात के बावजूद अदिति ने 69वीं राष्ट्रीय शालेय बास्केटबॉल प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया है, जिससे पूरे जिले और प्रदेश को गर्व की अनुभूति हुई है.
अदिति ऐसे परिवार से आती हैं, जहां मां घरों में काम करती हैं और पिता पेशे से ड्राइवर हैं. छह बहनों वाले इस परिवार में चार बहनें बास्केटबॉल खेल रही हैं. अदिति के साथ उनकी बहनें अंजली कोडापे और पावनी कोडापे भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीतकर परिवार और वार्ड का नाम रोशन कर चुकी हैं. यह उपलब्धि न केवल प्रतिभा की पहचान है, बल्कि यह भी साबित करती है कि अगर सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो कोई भी पृष्ठभूमि सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती.
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और वनांचल क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को निखारने का सराहनीय कार्य अंतर्राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रशिक्षक कालवा राजेश्वर राव और उनकी पत्नी कालवा राधा राव ने किया है. उनके प्रयासों से रेवाडिह वार्ड में बास्केटबॉल कोर्ट का निर्माण हुआ और शासकीय पूर्व माध्यमिक एवं प्राथमिक विद्यालय रेवाडिह के बच्चों को निःशुल्क प्रशिक्षण मिलना शुरू हुआ. आसपास के वार्डों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को खोजकर तराशने का यही परिणाम है कि आज यहां से निकले खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पदक जीत रहे हैं, वहीं कई खिलाड़ी शासकीय सेवाओं में भी चयनित हुए हैं.
अदिति कोडापे की उपलब्धियों की सूची बेहद प्रभावशाली है. उन्होंने सिंगापुर में आयोजित एनबीए राइजिंग स्टार इनविटेशनल इंटरनेशनल बास्केटबॉल टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया. अलग-अलग वर्षों में आयोजित तीन सीबीएसई क्लस्टर प्रतियोगिताओं में उन्होंने दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता. सब जूनियर और जूनियर स्कूल नेशनल प्रतियोगिताओं में कांस्य और स्वर्ण पदक, सीबीएसई नेशनल प्रतियोगिताओं में इंदौर और महेन्द्रगढ़ में स्वर्ण पदक तथा वाराणसी में सहभागिता, इसके अलावा लुधियाना में आयोजित जूनियर नेशनल और अम्बिकापुर व राजनांदगांव में राज्य स्तरीय शालेय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक हासिल कर उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है.
अदिति की खेल प्रतिभा को देखते हुए पहले युगांतर पब्लिक स्कूल और बाद में दिल्ली पब्लिक स्कूल राजनांदगांव ने उन्हें निःशुल्क प्रवेश दिया. अदिति अपनी और अपनी बहनों की सफलता का पूरा श्रेय अपने अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षकों कालवा राजेश्वर राव और कालवा राधा राव को देती हैं. साथ ही शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय रेवाडिह की शिक्षिका संजू मिश्रा और प्रधान पाठक अनुपराम कंवर के निरंतर प्रोत्साहन को भी वह अपनी सफलता की मजबूत नींव मानती हैं.
