बलरामपुर। चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होते ही बलरामपुर जिले का रामानुजगंज पूरी तरह भक्तिमय रंग में रंग गया है। कन्हर नदी तट पर स्थित मां महामाया मंदिर और मालकेतु पर्वत पर विराजित पहाड़ी माई मंदिर श्रद्धालुओं के प्रमुख आस्था केंद्र बन गए हैं। नवरात्रि के पहले ही दिन सुबह से दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गईं, जहां स्थानीय लोगों के साथ-साथ झारखंड और आसपास के राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
तड़के सुबह कन्हर नदी में स्नान के बाद भक्त पूरे विधि-विधान से माता की पूजा-अर्चना करते नजर आए। मंदिर परिसर में गूंजती घंटियां, मंत्रोच्चार और “जय माता दी” के जयकारों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण इस धाम की पहचान दूर-दराज तक फैली हुई है, जिसका अंदाजा पहले ही दिन उमड़ी भीड़ से लगाया जा सकता है।
मां महामाया मंदिर का इतिहास भी श्रद्धा से ओतप्रोत है। वर्ष 1935 में सरगुजा रियासत के तत्कालीन महाराज रामानुज शरण सिंह देव ने इस मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा कराई थी। समय के साथ यह मंदिर एक सिद्ध पीठ के रूप में स्थापित हो चुका है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है, यही वजह है कि हर साल नवरात्रि में यहां श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता है।
मंदिर में पूजा-अर्चना की परंपरा भी पीढ़ियों से चली आ रही है। एक ही परिवार द्वारा दशकों से सेवा की यह परंपरा धार्मिक और सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतीक बन चुकी है। परिसर में महामाया माता के साथ शीतला, काली, संतोषी माता, दक्षिणमुखी हनुमान और भगवान शंकर के मंदिर भी स्थित हैं, जहां विशेष अनुष्ठान और पूजा का आयोजन हो रहा है।
इधर, पहाड़ी माई मंदिर में भी श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा है। सात पहाड़ियों से घिरे इस मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्त लंबी चढ़ाई तय कर माता के दर्शन कर रहे हैं। ऊपर से दिखाई देने वाला कन्हर नदी और रामानुजगंज क्षेत्र का प्राकृतिक दृश्य श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति के साथ अद्भुत सुकून भी दे रहा है।
इस धाम तक पहुंचने की कहानी भी आस्था और एकजुटता की मिसाल है। कभी दुर्गम रहा यह रास्ता अब स्थानीय लोगों के श्रमदान और सहयोग से आसान हो चुका है। सड़क और सीढ़ियों के निर्माण ने श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाई है, जिससे हर साल यहां आने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
नवरात्रि के इन दिनों में रामानुजगंज केवल एक नगर नहीं, बल्कि आस्था का जीवंत केंद्र बन गया है, जहां हर ओर भक्ति, विश्वास और उत्साह की अनुभूति साफ देखी जा सकती है।
