सोगड़ा/जशपुर। ब्रह्मनिष्ठालय सोगड़ा के तत्वाधान में प्रति वर्ष की भाँति इस वर्ष भी परमपूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी का पावन ‘अनन्य दिवस’ पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। यह धार्मिक अनुष्ठान 17 जनवरी 2026 (शनिवार) को माघ कृष्णपक्ष चतुर्दशी (संवत 2082) के शुभ अवसर पर चड़िया संगम तट पर आयोजित होगा।
अनन्य दिवस का आध्यात्मिक महत्व
मान्यता है कि इसी पावन तिथि पर माँ अन्नपूर्णा ने अघोरेश्वर महाप्रभु को साक्षात दर्शन देकर अपना आशीर्वाद प्रदान किया था। तभी से इस दिन को ‘अनन्य दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन संगम तट पर स्नान और अघोरेश्वर पूजन का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है।
तीन नदियों का पावन संगम
चढ़िया संगम अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्ता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ तीन प्रमुख नदियों मधेश्वर, लावा और मनोरमा का मिलन होता है। इसी त्रिवेणी संगम के तट पर मुख्य आयोजन संपन्न होगा।
आयोजन की रूपरेखा
आश्रम प्रबंधन द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, उत्सव का समापन निम्नलिखित चरणों में होगा:
प्रातःकाल: अघोरेश्वर आसन एवं सर्वेश्वरी ध्वज के साथ श्रद्धालु सोगड़ा आश्रम से चढ़िया संगम के लिए प्रस्थान करेंगे।
ध्वजारोहण एवं पूजन: संगम तट पर पहुँचकर ध्वजारोहण किया जाएगा, जिसके पश्चात विधि-विधान से पूजन, आरती और हवन संपन्न होगा।
प्रसाद वितरण: हवन के उपरांत उपस्थित भक्तों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा।
दोपहर की गोष्ठी: दोपहर में एक विशेष गोष्ठी का आयोजन होगा, जिसमें विद्वानों और साधकों द्वारा धर्म, साधना एवं अघोरेश्वर महाप्रभु के जीवन दर्शन पर चर्चा की जाएगी।
भजन एवं वापसी: संध्या समय भजन-कीर्तन के पश्चात पुनः पूजन-आरती होगी, जिसके बाद अघोरेश्वर आसन और सर्वेश्वरी ध्वज की सोगड़ा आश्रम वापसी होगी।
इस आयोजन को लेकर स्थानीय भक्तों और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। आश्रम प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से इस पावन पर्व में सम्मिलित होकर पुण्य लाभ प्राप्त करने की अपील की है।
