ग्वालियर. मध्य प्रदेश के ग्वालियर हाईकोर्ट पीठ ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए श्योपुर के विजयपुर विधानसभा से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा के निर्वाचन को रद्द कर दिया है..और उनके चुनाव को शून्य घोषित कर दिया है. दरअसल, ये अहम फैसला भाजपा नेता और मोहन सरकार के पूर्व मंत्री रामनिवास रावत द्वारा अदालत में दाखिल चुनाव याचिका पर हुई सुनवाई के बाद आया है. याचिकाकर्ता रावत ने मल्होत्रा पर चुनावी हलफनामे में आपराधिक रिकॉर्ड छिपाने की याचिका दायर की थी. भाजपा नेता और पूर्व मंत्री रामनिवास रावत ने अदालत में पेश की याचिका में बताया था कि मुकेश मल्होत्रा के खिलाफ 6 अलग-अलग आपराधिक मामले दर्ज थे. मल्होत्रा ने इसका जिक्र अपने चुनावी हलफनामे में नहीं किया था.
मध्य प्रदेश के विजयपुर विधानसभा के राजनैतिक उथल पुथल की बात करें. तो यंहा की राजनैतिक कहानी बड़ी ही दिलचस्प है. दरअसल रामनिवास रावत 2023 में विधानसभा चुनाव कांग्रेस की टिकट पर जीते थे. पर 2024 के लोकसभा चुनाव के ठीक पहले कांग्रेसी रामनिवास रावत की बीजेपी में एंट्री हो जाती है. इतना ही नहीं बीजेपी में इंट्री के तुरंत बाद उन्हें मोहन यादव सरकार में सीधे कैबिनेट मंत्री बना दिया जाता है. उसके बाद विजयपुर में उपचुनाव होता है. लेकिन दुर्भाग्य से उपचुनाव में कांग्रेस से भाजपा में आए. रामनिवास रावत को हार का सामना करना पड़ता है और मंत्री पद से भी इस्तीफा देना पड़ता है. वही इस उपचुनाव में कभी बीजेपी नेता रहे विजय मल्होत्रा कांग्रेस की टिकट से विधायक निर्वाचित हो गए.
इस विधानसभा में मची भगदड़ और भाजपा में जाकर उपचुनाव हार चुके रामनिवास रावत इस राजनैतिक भूचाल के बाद कांग्रेस विधायक के खिलाफ हाई कोर्ट की शरण में जाते हैं. जिसके बाद रावत की याचिका पर मुकेश मल्होत्रा के हलफनामे की लगातार सुनवाई कर रहे हाईकोर्ट ने आज सोमवार को यह फैसला सुनाया है.
मध्यप्रदेश के श्योपुर के मुकेश मल्होत्रा भले ही अपनी विधायकी गवां चुके हैं. पर मल्होत्रा जिले और प्रदेश के बड़े आदिवासी नेताओं की फेहरिस्त में शामिल है. उनके बड़े होने का अंदाजा इस बात से भी लगा सकते हैँ कि वे एमपी भाजपा सरकार में दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री रह चुके हैं और 2023 में बीजेपी से टिकट नहीं मिलने पर जब वो निर्दलीय चुनाव लड़े थे. तब उन्हें 45 हज़ार वोट हासिल हुए. मल्होत्रा सहारिया आदिवासी समाज से आते हैं और इस समाज के 70 हजार से अधिक वोटो की संख्या को देखते हुए. मई 2024 में प्रियंका गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल कराया गया था. और उपचुनाव में कांग्रेस ने मल्होत्रा पर जब दांव लगाया. तो उन्होंने कांग्रेस विधायक होते हुए बीजेपी में गए रामनिवास रावत को चुनाव हराया था.
फिलहाल, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कांग्रेस विधायक मल्होत्रा की विधायकी रद्द करके दूसरे स्थान मे रहे रावत को विधायक घोषित करने के लिए कह दिया है. पर देखना है कि इस फैसले की खिलाफ कांग्रेस सर्वोच्च न्यायालय की चौखट में माथा टेकती है. या फिर अपने ही सिक्के को खोता मानकर चुप चाप बैठ जाती है.
