नरसिंहपुर. मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. पुलिस ने म्यूल अकाउंट गिरोह का पर्दाफाश करते हुए ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसके जरिए साइबर अपराधियों द्वारा करोड़ों रुपये के अवैध लेन-देन को अंजाम दिया जा रहा था. जांच में अब तक लगभग 15 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन सामने आए हैं, जिसने पूरे मामले की गंभीरता को उजागर कर दिया है.
जानकारी के अनुसार, जिले में पिछले कुछ समय से ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ लोग आम नागरिकों को छोटे आर्थिक लाभ का लालच देकर उनके बैंक खाते, पासबुक और एटीएम कार्ड हासिल कर रहे हैं. इन खातों का उपयोग बाद में साइबर ठगी, ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म और सेक्सटॉर्शन जैसे अपराधों से प्राप्त धन को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था.
मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना ने विशेष जांच टीम का गठन किया. टीम को तकनीकी माध्यमों से संदिग्ध बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की जानकारी जुटाकर विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए गए. जांच के दौरान विभिन्न बैंकों से खातों की जानकारी लेकर उनके लेन-देन का गहन विश्लेषण किया गया.
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तफ्तीश में यह तथ्य सामने आया कि जिले में करीब 180 बैंक खातों का उपयोग म्यूल अकाउंट के रूप में किया जा रहा था. इन खातों के जरिए साइबर अपराधियों द्वारा अवैध धन को अलग-अलग प्लेटफॉर्म और खातों में ट्रांसफर कर छिपाने का काम किया जा रहा था. पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित बैंकों से संपर्क कर इन खातों के संचालन को रोकने की प्रक्रिया शुरू कर दी.
पुलिस की अब तक की कार्रवाई में 35 म्यूल अकाउंट बंद कराए जा चुके हैं, जबकि इस पूरे मामले में 17 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है. गिरफ्तार आरोपियों में करेली, ठेमी, गाडरवाड़ा सहित आसपास के क्षेत्रों के लोग शामिल हैं. इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है.
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से 9 पासबुक, 4 एटीएम कार्ड और 9 मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं. इसके अलावा कई संदिग्ध व्यक्तियों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की गई है.
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का सकारात्मक परिणाम सामने आ रहा है. पिछले एक वर्ष के दौरान साइबर फ्रॉड से जुड़े मामलों में करीब 45 लाख रुपये की राशि को होल्ड कराया गया, जबकि लगभग 53 लाख रुपये पीड़ित खाताधारकों को वापस दिलाए गए हैं.
इस पूरे मामले का खुलासा करने में करेली थाना प्रभारी निरीक्षक रत्नाकर हिग्वें, स्टेशनगंज निरीक्षक सौरभ पटेल, गाडरवाड़ा निरीक्षक अशोक चौहान समेत पुलिस टीम के कई अधिकारियों और कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही.
