तेहरान/तेल अवीव. मध्य पूर्व में चल रहा संघर्ष अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग 21वें दिन और अधिक व्यापक हो गई है, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे पर बड़े हमले करने के दावे कर रहे हैं. इस बीच ईरान ने पहली बार अमेरिका की सैन्य ताकत को सीधी चुनौती देते हुए अत्याधुनिक एफ-35 लड़ाकू विमान को निशाना बनाने का दावा किया है.
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने एक वीडियो जारी कर कहा है कि उसने अमेरिकी एफ-35 फाइटर जेट पर हमला किया. हालांकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. वहीं अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने यह जरूर स्वीकार किया है कि मिशन के दौरान एक एफ-35 जेट को इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी. कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स के मुताबिक पायलट सुरक्षित है और पूरे मामले की जांच की जा रही है, लेकिन ईरानी हमले की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की गई है.
इसी बीच ईरान ने इजराइल पर जवाबी कार्रवाई तेज करते हुए तेल अवीव स्थित रिफाइनरी पर बमबारी का दावा किया है. हमले के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है. ऊर्जा क्षेत्र पर इसका असर भी साफ दिखने लगा है. कतर एनर्जी के अनुसार ईरानी हमलों के चलते उसकी लिक्विफाइड नेचुरल गैस निर्यात क्षमता का करीब 17 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ है, जिससे सालाना करीब 20 अरब डॉलर के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है. इसका असर यूरोप और एशिया तक पड़ सकता है.
उधर इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनका देश युद्ध में बढ़त बनाए हुए है और ईरान को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. उन्होंने दावा किया कि बीते 20 दिनों में इजराइल ने कई अहम सफलताएं हासिल की हैं.
इस संघर्ष में अब क्षेत्रीय संगठन भी खुलकर सामने आ रहे हैं. Hezbollah ने उत्तरी इजराइल के मार्गलियोट क्षेत्र पर मिसाइल हमले का दावा किया है, साथ ही नबातियेह प्रांत के मारौन अल-रास इलाके में इजराइली सैनिकों को निशाना बनाने की बात कही है.
ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं हुआ तो यह संघर्ष कई देशों को अपनी चपेट में ले सकता है और वैश्विक संकट गहरा सकता है.
वहीं क्षेत्रीय हालात को लेकर कूटनीतिक हलचल भी तेज हो गई है. Mohammed bin Zayed Al Nahyan और Donald Trump के बीच फोन पर बातचीत हुई, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक शांति पर प्रभाव को लेकर चर्चा की गई. अमेरिका ने इन हमलों की निंदा करते हुए यूएई समेत अपने सहयोगी देशों के साथ खड़े रहने की बात दोहराई है.
इसी कड़ी में Jean-Noël Barrot का इजराइल दौरा भी तय हुआ है, जहां वे क्षेत्र में बढ़ते तनाव, मानवीय सहायता और युद्धविराम की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे. लगातार बढ़ते हमलों और दावों के बीच मिडिल ईस्ट की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और वैश्विक स्तर पर इसके गंभीर परिणाम सामने आने की आशंका जताई जा रही है.
