नई दिल्ली. देशभर में आज गुरुवार, 12 फरवरी 2026 को भारत बंद का असर देखने को मिल रहा है. केंद्र सरकार की नीतियों और नए श्रम कानूनों के विरोध में चौदह राष्ट्रीय ट्रेड यूनियनों ने मिलकर राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल का ऐलान किया है. इस हड़ताल को कृषि, ग्रामीण और अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिक संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है.
इस आंदोलन में केंद्रीय व राज्य सिविल सेवाओं के कर्मचारी, शिक्षक, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारी और कई स्वतंत्र ट्रेड यूनियनें शामिल हैं. संगठनों का दावा है कि इस बंद में करीब 30 करोड़ मजदूर और किसान भाग ले सकते हैं, जिससे कई राज्यों में जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है.
भारत बंद का सबसे अधिक असर केरल, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में देखा जा रहा है, जहां ट्रेड यूनियनों का समर्थन काफी मजबूत है.
केरल में हड़ताल के कारण हालात सबसे ज्यादा गंभीर हैं। यहां परिवहन सेवाएं पूरी तरह बंद बताई जा रही हैं और सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति भी बेहद कम रहने की संभावना है. राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए कर्मचारियों की अनधिकृत अनुपस्थिति को ‘डाइस-नॉन’ घोषित कर दिया है. सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया कि हड़ताल के कारण गैरहाजिरी को सेवा में अनुपस्थिति माना जाएगा.
इधर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी भारत बंद का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा. राहुल गांधी ने कहा कि श्रमिकों और किसानों की चिंताओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि चार श्रम संहिताएं, व्यापार समझौते और MGNREGA को कमजोर करने जैसी नीतियों से श्रमिकों और किसानों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ सकता है.
वहीं दूसरी ओर, कर्नाटक सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने साफ कर दिया है कि राज्य में स्कूल आज सामान्य रूप से संचालित होंगे. स्कूल शिक्षा आयुक्त विकास किशोर सुरालकर ने कहा कि अप्रत्याशित परिस्थितियों में जिला आयुक्तों को निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है.
भारत बंद को लेकर केरल में KSRTC कर्मचारी संघों और निजी बस संघों ने भी समर्थन दे दिया है, जिससे राज्य में बस सेवाएं लगभग ठप हो गई हैं.
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन सेंटर (TUCC) की राज्य समिति ने भी हड़ताल में भागीदारी की है. संगठन ने इसे श्रमिकों की मांगों के समर्थन में चल रहे व्यापक आंदोलन का हिस्सा बताया.
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी ट्रेड यूनियनों ने नए लेबर कोड और अन्य कानूनों के विरोध में आम हड़ताल का आह्वान किया है.
इधर किसान संगठनों ने भी बंद को मजबूती दी है. संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने किसानों से अपील की थी कि वे आज की अखिल भारतीय आम हड़ताल को समर्थन दें.
घर से निकलने से पहले जान लें ये जरूरी बातें
आज भारत बंद के चलते कई जगहों पर बस, टैक्सी, ऑटो और लोकल ट्रांसपोर्ट प्रभावित हो सकता है. कई शहरों में चक्का जाम की स्थिति बन सकती है, जिससे यातायात बाधित होने की संभावना है. बाजारों और दुकानों पर भी असर पड़ सकता है. कई क्षेत्रों में दुकानें, होटल और रेस्टोरेंट बंद रहने की आशंका जताई जा रही है.
हालांकि हवाई अड्डों पर सेवाएं सामान्य रहने की संभावना है, लेकिन ट्रैफिक जाम और सड़क अवरोध के कारण यात्रियों को समय से पहले निकलने की सलाह दी जा रही है.
स्कूल-कॉलेज बंद होंगे या खुलेंगे?
देशभर में स्कूल-कॉलेज के लिए कोई आधिकारिक राष्ट्रीय अवकाश घोषित नहीं किया गया है. लेकिन केरल, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में बंद को मिल रहे मजबूत समर्थन के कारण स्कूल और कॉलेजों के संचालन पर असर पड़ सकता है. अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे अपने-अपने स्कूल प्रशासन से जानकारी लेकर ही बच्चों को भेजें.
ट्रेन और फ्लाइट का क्या होगा?
भारत बंद के दौरान आमतौर पर रेलवे और हवाई सेवाएं चलती रहती हैं, लेकिन बंद के कारण रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट तक पहुंचना कठिन हो सकता है. कई स्थानों पर लोकल ट्रांसपोर्ट बंद होने से यात्रियों को परेशानी हो सकती है.
बैंक खुलेंगे या बंद?
भारत बंद का असर बैंकिंग सेवाओं पर भी पड़ सकता है. AIBEA, AIBOA और BEFI समेत कई बैंक कर्मचारी संगठनों ने विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का ऐलान किया है. इसके चलते सरकारी और सार्वजनिक बैंकों में कामकाज प्रभावित हो सकता है और कई जगह शाखाओं में लेन-देन बाधित रहने की संभावना है.
क्यों बुलाया गया भारत बंद? क्या हैं प्रमुख मांगें?
ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने भारत बंद के जरिए केंद्र सरकार से कई मांगें रखी हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं –
• नवंबर 2025 में अधिसूचित चार नए श्रम संहिताओं और नियमों को रद्द करने की मांग
• बीज विधेयक, विद्युत संशोधन विधेयक और शांति अधिनियम के मसौदे को वापस लेने की मांग
• MGNREGA की बहाली और इसे कमजोर करने के प्रयासों का विरोध
• विक्षित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025 का विरोध
• बिजली, कृषि और श्रमिक हितों से जुड़े प्रस्तावित कानूनों को वापस लेने की मांग
भारत बंद को लेकर ट्रेड यूनियनों का कहना है कि केंद्र सरकार की नीतियां मजदूरों और किसानों के अधिकारों को कमजोर कर रही हैं, इसलिए देशव्यापी आंदोलन जरूरी हो गया है.
