नई दिल्ली. रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद सोना-चांदी की कीमतें अचानक तेज़ रफ्तार से नीचे आई हैं. लगातार दूसरे दिन भारी बिकवाली के दबाव में सर्राफा बाजार में जोरदार गिरावट दर्ज की गई. रविवार को चांदी में लोअर सर्किट लग गया और इसका भाव 26,273 रुपये यानी करीब 9 प्रतिशत टूटकर 2,65,652 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया. वहीं सोने की कीमतों में भी करीब 3 प्रतिशत की गिरावट देखी गई और भाव 1.47 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गए. बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक ऊंचे दामों पर मुनाफावसूली इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह रही, जहां निवेशकों ने रिकॉर्ड भाव का फायदा उठाकर जमकर बिकवाली की.
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मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मार्च डिलीवरी वाली चांदी शुक्रवार और रविवार, दो दिन में कुल 1,34,241 रुपये यानी 33.6 प्रतिशत टूट चुकी है. शुक्रवार को चांदी 27 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 2,91,925 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी, जिसके बाद रविवार को यह और फिसलकर अपने लोअर सर्किट स्तर 2,65,652 रुपये पर पहुंच गई. साप्ताहिक आधार पर देखें तो 23 जनवरी के 3,34,699 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर से चांदी करीब 69,047 रुपये यानी लगभग 21 प्रतिशत नीचे आ चुकी है.
सोने में भी उतार-चढ़ाव कम नहीं रहा. अप्रैल डिलीवरी वाला गोल्ड रविवार को एक समय 9 प्रतिशत तक गिरकर 1,38,634 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया और इसमें भी लोअर सर्किट लगा. हालांकि बाद में कुछ रिकवरी देखने को मिली और कारोबार के अंत में यह 4,241 रुपये यानी करीब 3 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,48,104 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. बीते दो दिनों में सोना कुल 44,992 रुपये सस्ता हो चुका है. इससे पहले शुक्रवार को भी सोने के दाम 31,617 रुपये गिरकर 1,52,345 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गए थे, जबकि गुरुवार को ही इसने 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम का रिकॉर्ड स्तर छुआ था.
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बाजार जानकारों का मानना है कि यह गिरावट अभी थमने वाली नहीं है. जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड में कमोडिटी और करेंसी रिसर्च के उपाध्यक्ष प्रणव मेर के अनुसार, कीमतों में अत्यधिक तेजी के बाद इस तरह का तेज़ करेक्शन सामान्य है. उन्होंने बताया कि घरेलू बाजार में सोना अपने लाइफटाइम हाई से करीब 20 प्रतिशत और चांदी लगभग 37 प्रतिशत नीचे आ चुकी है. उनका कहना है कि आने वाले कुछ कारोबारी सत्रों में तकनीकी कारणों से सोना-चांदी में और गिरावट देखने को मिल सकती है, इसके बाद कीमतें कुछ समय के लिए स्थिर हो सकती हैं. निवेशकों के लिए यह दौर सतर्कता के साथ कदम रखने का संकेत दे रहा है.
