नई दिल्ली. लगातार बढ़ती महंगाई के बीच रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए पेंशन आज सबसे बड़ा सहारा है, लेकिन जब यही पेंशन रोजमर्रा की जरूरतें भी पूरी न कर पाए तो बुजुर्गों की चिंता स्वाभाविक है. ऐसे हालात में यूनियन बजट 2026 से पहले एक राहत भरी उम्मीद सामने आई है. लंबे समय से अटकी पड़ी न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग पर अब केंद्र सरकार गंभीर नजर आ रही है. सूत्रों के अनुसार, बजट के दौरान या उसके तुरंत बाद कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़े पेंशनधारकों के लिए बड़ा फैसला लिया जा सकता है.
वर्तमान में EPFO के अंतर्गत आने वाले पेंशनधारकों को न्यूनतम 1000 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलती है, जो पिछले 11 वर्षों से बिना किसी बदलाव के जारी है. इस दौरान महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है, ऐसे में यह राशि बुजुर्गों के लिए महज प्रतीकात्मक बनकर रह गई है. कर्मचारी संगठनों का साफ कहना है कि मौजूदा आर्थिक हालात में 1000 रुपये की पेंशन न तो सम्मानजनक जीवन दे सकती है और न ही बुनियादी जरूरतें पूरी कर सकती है.
इसी मांग को लेकर 6 जनवरी को भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री से मुलाकात की थी. बैठक में न्यूनतम पेंशन बढ़ाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया, जिस पर मंत्री की ओर से सकारात्मक संकेत मिले. इसके साथ ही कई अन्य कर्मचारी संगठनों ने भी न्यूनतम पेंशन को 7,000 से 10,000 रुपये प्रतिमाह तक बढ़ाने की मांग दोहराई है, ताकि रिटायर्ड कर्मचारियों को सम्मानजनक जीवन मिल सके.
यह मामला अब केवल नीतिगत चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है. ऐसे में सरकार पर निर्णय लेने का दबाव और बढ़ गया है. जानकारों का मानना है कि बजट 2026 इस मुद्दे पर निर्णायक साबित हो सकता है और वर्षों से इंतजार कर रहे पेंशनधारकों को बड़ी राहत मिल सकती है.
इसी बीच EPFO भी अपनी सेवाओं को सरल और सुगम बनाने की दिशा में कदम उठा रहा है. संगठन ‘सुविधा सहायक’ तैनात करने की योजना पर काम कर रहा है, जो पेंशन, पीएफ क्लेम, खाते से जुड़ी प्रक्रियाओं और अन्य कार्यों में सदस्यों की मदद करेंगे. तय शुल्क पर मिलने वाली इस सुविधा से खासतौर पर बुजुर्ग पेंशनधारकों को दफ्तरों के चक्कर लगाने से निजात मिलने की उम्मीद है. कुल मिलाकर, बजट 2026 रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए उम्मीदों का बजट साबित हो सकता है.
