नई दिल्ली. बजट 2026 में केंद्र सरकार ने शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए एक ऐसा प्रस्ताव रखा है, जो उनकी जेब पर सीधा असर डाल सकता है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को पेश किए गए बजट में संकेत दिया कि अब डिविडेंड देने वाले शेयरों या म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए कर्ज लेना पहले जितना फायदेमंद नहीं रहेगा. वजह यह है कि सरकार उस टैक्स छूट को खत्म करने जा रही है, जिसके तहत उधार लिए गए पैसे पर चुकाए गए ब्याज को आय से घटाकर टैक्स कम किया जा सकता था.
अब तक इनकम टैक्स के नियम निवेशकों को यह राहत देते थे कि वे डिविडेंड या म्यूचुअल फंड यूनिट्स से होने वाली आमदनी के बदले, कर्ज पर दिए गए ब्याज का एक हिस्सा डिडक्शन के रूप में क्लेम कर सकें. इससे उनकी टैक्स योग्य आय घट जाती थी और टैक्स का बोझ कुछ हल्का हो जाता था. खास तौर पर वे निवेशक, जो इनकम देने वाला पोर्टफोलियो बनाने के लिए उधार का सहारा लेते थे, इस नियम का लाभ उठाते थे.
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मौजूदा व्यवस्था के तहत इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 93 में यह प्रावधान था कि डिविडेंड या म्यूचुअल फंड इनकम के मुकाबले अधिकतम 20 प्रतिशत तक ब्याज खर्च को डिडक्शन के रूप में माना जाएगा. यानी अगर किसी निवेशक की डिविडेंड इनकम 1 लाख रुपये है और उसने कर्ज पर 25 हजार रुपये ब्याज चुकाया है, तो वह अधिकतम 20 हजार रुपये तक ही डिडक्शन ले सकता था. यह सीमा निवेशकों को आंशिक राहत जरूर देती थी.
लेकिन बजट 2026 में सरकार ने इस व्यवस्था को पूरी तरह बदलने का प्रस्ताव रखा है. बजट दस्तावेजों के मुताबिक, अब डिविडेंड इनकम या म्यूचुअल फंड यूनिट्स से होने वाली आमदनी के लिए किए गए किसी भी ब्याज खर्च पर कोई टैक्स कटौती नहीं मिलेगी. इसके लिए इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 93 में संशोधन किया जाएगा और ब्याज डिडक्शन की अनुमति देने वाला प्रावधान हटा दिया जाएगा.
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इनकम टैक्स विभाग ने साफ कर दिया है कि संशोधन लागू होने के बाद डिविडेंड और म्यूचुअल फंड से होने वाली आय की गणना बिना किसी ब्याज खर्च की कटौती के की जाएगी. इसका मतलब यह है कि उधार लेकर निवेश करने वालों को अब पूरे डिविडेंड या म्यूचुअल फंड इनकम पर टैक्स चुकाना होगा, चाहे उन्होंने कर्ज पर कितना भी ब्याज क्यों न दिया हो. साफ है कि इस बदलाव के बाद लोन लेकर निवेश करने की रणनीति पहले से कहीं ज्यादा महंगी साबित हो सकती है.
