अम्बिकापुर. धर्म परिवर्तन और आरक्षण को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है. सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले, जिसमें धर्म परिवर्तन के साथ अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त होने की बात कही गई है, पर जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मंत्री गणेश राम भगत ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए खुशी जताई और कहा कि इससे धर्मांतरण पर प्रभावी अंकुश लगेगा.
भगत ने कहा कि सरगुजा और जशपुर जैसे इलाकों में तेजी से धर्म परिवर्तन हो रहा है, जिससे जनजातीय समाज की परंपरा और सांस्कृतिक पहचान प्रभावित हो रही है. उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय एक मजबूत संदेश देता है कि अपनी मूल पहचान छोड़ने के बाद विशेष संवैधानिक सुविधाओं पर पुनर्विचार जरूरी है.
उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में जनजाति समाज को लेकर भी इसी तरह का स्पष्ट फैसला सामने आएगा. उनका कहना था कि देशभर में आदिवासी समुदाय के बीच तेजी से हो रहे धर्मांतरण को रोकने के लिए ठोस नीति और कड़े कदम उठाने की जरूरत है. भगत ने यह भी कहा कि जो अपनी परंपरा और संस्कृति को छोड़ देता है, उसे आदिवासी की श्रेणी में रखना उचित नहीं है.इसी मुद्दे को लेकर जनजाति समाज अब खुलकर सामने आ रहा है. भगत ने जानकारी दी कि 24 मई को दिल्ली में करीब 5 लाख लोगों की भागीदारी के साथ धर्मांतरण के खिलाफ एक बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा. इसके साथ ही केंद्र सरकार से मांग की गई है कि जो लोग जनजाति समाज से धर्मांतरित हो चुके हैं, उनके आरक्षण लाभ को समाप्त किया जाए.
इसी मुद्दे को लेकर जनजाति समाज अब खुलकर सामने आ रहा है. भगत ने जानकारी दी कि 24 मई को दिल्ली में करीब 5 लाख लोगों की भागीदारी के साथ धर्मांतरण के खिलाफ एक बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा. इसके साथ ही केंद्र सरकार से मांग की गई है कि जो लोग जनजाति समाज से धर्मांतरित हो चुके हैं, उनके आरक्षण लाभ को समाप्त किया जाए.उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने जनजाति समाज के लिए भी आगे की दिशा तय करने का रास्ता खोल दिया है और आने वाले समय में इस पर बड़ी नीतिगत पहल देखने को मिल सकती है.
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने जनजाति समाज के लिए भी आगे की दिशा तय करने का रास्ता खोल दिया है और आने वाले समय में इस पर बड़ी नीतिगत पहल देखने को मिल सकती है.
