अम्बिकापुर. छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर में आज राजनीति ने ऐसा रंग पकड़ा कि गांधी, लोकतंत्र और युवाओं की सोच तीनों एक साथ चर्चा के केंद्र में आ गए. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बलिदान दिवस पर अम्बिकापुर पहुंचे कन्हैया कुमार ने जहां सत्य, अहिंसा और लोकतंत्र को बचाने का संदेश देते हुए जनतंत्र बनाम “गनतंत्र” की बहस छेड़ी, वहीं उनके इस दौरे ने सियासी गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं भी पैदा कर दीं. कन्हैया कुमार ने मीडिया के माध्यम से अंग्रेजी हुकूमत, पुलिस तैनाती और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सवाल उठाए, तो दूसरी ओर उनके अम्बिकापुर आगमन को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर ने युवाओं के भविष्य, राष्ट्र की अखंडता और विचारधाराओं की टकराहट का मुद्दा उठाते हुए पलटवार किया. एक ओर गांधी के विचारों की बात, दूसरी ओर “टुकड़े-टुकड़े गैंग” का आरोप, अम्बिकापुर की धरती पर आज बयान नहीं, बल्कि सियासत के दो बिल्कुल अलग नज़रिए आमने-सामने खड़े नजर आए.
छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर पहुंचे कन्हैया कुमार ने मीडिया से मुखातिब हुए हुए कहा कि, मीडिया के माध्यम से हम राष्ट्रपिता, बापू का संदेश देना चाहते है. बापू ने सत्य और अहिंसा का मार्ग बताया है. यह सिर्फ देश के लिए नहीं, पूरी मानवता के लिए, पूरी दुनिया के लिए एक मंत्र है, एक संकल्प है. आज उनके बलिदान दिवस के दिन सरगुजा, अम्बिकापुर, मां महामाया की धरती पर उस संकल्प को दोहराएंगे. और एक गंभीर विषय है हमारे देश में.. कि भारत में लोकतंत्र का क्या होगा, जनतंत्र का क्या होगा. इस विषय पर बातचीत, राय मशवरा करेंगे. मैं यहां कोई ज्ञान, राजनीति या नेतागिरी करने नहीं आया हूं. अम्बिकापुर के अपने सभी भाइयों और बहनों से मिलने आया हूं.. और में मिलकर सामूहिक रूप से संकल्प लेने की चेष्टा करेंगे, कोशिश करेंगे.. कि भारत का लोकतंत्र, जनतंत्र.. जनतंत्र ही बना रहे, गनतंत्र ना बने. गोडसे के विचार जिस तरह से देश में फैल रहे है. हिंसा और नफरत का विचार जिस तरह से फैल रहा है उसको रोका जाए. यही बापू को बलिदान दिवस के दिन सच्ची श्रद्धांजलि है. मेरे कार्यक्रम को रोकने के लिए पुलिस क्यों तैनात होगी. कोई अंग्रेजों का राज है क्या? ये ब्रिटिश के पुलिस थोड़ी है. कांग्रेस का कार्यक्रम रोकने के लिए रानी विक्टोरिया की पुलिस लगाई जाती थी, घुड़सवार लगाए जाते थे. अगर ऐसा है तब ये सवाल भाजपा से पूछिए कि क्या भारत में अंग्रेजी राज पुनः आ गया है. महात्मा गांधी को याद करना कोई गैरकानूनी काम है. यह सवाल इस प्रदेश के गृहमंत्री से पूछा जाना चाहिए. मुझे नहीं लगता कि मुझे रोकने के लिए ऐसा किया गया है. क्योंकि ये काम तो अंग्रेज किया करते है. हो सकता है इनके पुराने संबंध हो. सत्ता इनके पास आई है. अहंकार में ऐसा कर रहे है वो. लेकिन इससे हमलोगों को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है.
वहीं कन्हैया कुमार के अम्बिकापुर दौरे को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर ने कहा कि, कुछ दिनों पहले देश के महान गणितज्ञ और शिक्षाविद सुपर 30 के संस्थापक पद्मश्री आनंद कुमार को सरगुजा के युवाओं की परीक्षा की तैयारी तथा उन्हें मार्गदर्शन देने के लिए बुलाया था. आज यह देखने को मिल रहा है कि देश को टुकड़े-टुकड़े करने वाली गैंग के अहम सदस्य कन्हैया कुमार को बुलाया गया है. कन्हैया कुमार की आईडियोलॉजी को सरगुजा की धरती के युवा और छत्तीसगढ़ के युवा अस्वीकार करते हैं और उनकी झूठी और फरेब की राजनीति यहां नहीं चलने वाली. ऐसे व्यक्ति को यहां बुलाने वाले तथा उनके साथ मंच साझा करने वाले भी भारत मां की अखंडता को पसंद नहीं करते और सरगुजा के युवाओं को यह देखना होगा कि ऐसे व्यक्ति जिनके ऊपर देश के विरुद्ध नारे लगाने तथा देश के टुकड़े करने की बात कहने का आरोप है, ऐसे व्यक्ति को बुलाने वाले कौन है.
