रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा में सोमवार को शून्यकाल के दौरान बीजापुर जिले के गंगालूर स्थित पोटा केबिन में छात्राओं के गर्भवती होने के मामले को लेकर जोरदार हंगामा हुआ. विपक्ष ने इस गंभीर मामले पर स्थगन प्रस्ताव लाकर तत्काल चर्चा की मांग की, लेकिन आसंदी द्वारा स्थगन की सूचना अग्राह्य किए जाने पर विपक्षी विधायकों ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करते हुए बहिर्गमन कर दिया.
मामला उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि गंगालूर पोटा केबिन में नाबालिग छात्राओं, खासकर आदिवासी बच्चियों के साथ इस तरह की घटनाएं वर्षों से सामने आती रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि 2002 से लगातार ऐसे मामले सामने आने के बावजूद सरकार दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है. उन्होंने मांग की कि सदन की कार्यवाही रोककर इस गंभीर विषय पर विस्तृत चर्चा कराई जाए.विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि मामले में एक छात्रा 11वीं और दूसरी 12वीं कक्षा में पढ़ती थी, लेकिन अब तक इस प्रकरण में सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने आरोप लगाया कि मिली जानकारी के अनुसार दोनों छात्राओं को छात्रावास से भगा दिया गया है और प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले में लीपापोती की जा रही है.
विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि मामले में एक छात्रा 11वीं और दूसरी 12वीं कक्षा में पढ़ती थी, लेकिन अब तक इस प्रकरण में सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने आरोप लगाया कि मिली जानकारी के अनुसार दोनों छात्राओं को छात्रावास से भगा दिया गया है और प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले में लीपापोती की जा रही है.विधायक अनिला भेड़िया ने कहा कि यह बस्तर क्षेत्र से जुड़ा बेहद संवेदनशील मामला है. जब अधीक्षिका के खिलाफ शिकायतें सामने आती हैं तो कार्रवाई करने के बजाय उन्हें संरक्षण देने की कोशिश की जाती है. उन्होंने कहा कि आदिवासी परिवार अपने बच्चों को पढ़ने के लिए भेजते हैं, ऐसे में इस तरह की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और इस पर तत्काल चर्चा होनी चाहिए.
विधायक अनिला भेड़िया ने कहा कि यह बस्तर क्षेत्र से जुड़ा बेहद संवेदनशील मामला है. जब अधीक्षिका के खिलाफ शिकायतें सामने आती हैं तो कार्रवाई करने के बजाय उन्हें संरक्षण देने की कोशिश की जाती है. उन्होंने कहा कि आदिवासी परिवार अपने बच्चों को पढ़ने के लिए भेजते हैं, ऐसे में इस तरह की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और इस पर तत्काल चर्चा होनी चाहिए.विधायक देवेंद्र यादव ने भी मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि छात्राओं के साथ गलत कृत्य जैसे संवेदनशील मुद्दों को छिपाने की कोशिश करना बेहद शर्मनाक है और इस विषय पर सदन में विस्तृत चर्चा आवश्यक है.
विधायक देवेंद्र यादव ने भी मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि छात्राओं के साथ गलत कृत्य जैसे संवेदनशील मुद्दों को छिपाने की कोशिश करना बेहद शर्मनाक है और इस विषय पर सदन में विस्तृत चर्चा आवश्यक है.नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि पोटा केबिन में होने वाली घटनाएं नई नहीं हैं, बल्कि वर्षों से सामने आती रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार छात्राओं की अचानक मौत की घटनाओं को भी बीमारी बताकर मामला दबा दिया जाता है. उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले पर गंभीरता से विचार कर सदन में चर्चा कराने की मांग की.
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि पोटा केबिन में होने वाली घटनाएं नई नहीं हैं, बल्कि वर्षों से सामने आती रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार छात्राओं की अचानक मौत की घटनाओं को भी बीमारी बताकर मामला दबा दिया जाता है. उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले पर गंभीरता से विचार कर सदन में चर्चा कराने की मांग की.विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि विपक्ष के आरोप निराधार हैं और सरकार किसी भी दोषी को बचाने की कोशिश नहीं कर रही है. उन्होंने बताया कि जिन तीन छात्राओं का जिक्र किया जा रहा है, वे वर्तमान में पोटा केबिन में अध्ययनरत नहीं हैं. छात्राओं और उनके परिजनों ने भी बयान दिया है कि वे स्वयं आना-जाना करती थीं.
विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि विपक्ष के आरोप निराधार हैं और सरकार किसी भी दोषी को बचाने की कोशिश नहीं कर रही है. उन्होंने बताया कि जिन तीन छात्राओं का जिक्र किया जा रहा है, वे वर्तमान में पोटा केबिन में अध्ययनरत नहीं हैं. छात्राओं और उनके परिजनों ने भी बयान दिया है कि वे स्वयं आना-जाना करती थीं.मंत्री ने कहा कि पोटा केबिन कलेक्टर की देखरेख में संचालित होते हैं और प्रशासन की लगातार निगरानी रहती है. उन्होंने यह भी कहा कि मामला संदिग्ध है और स्थानीय कलेक्टर के निर्देश पर इसकी जांच कराई जा रही है. जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
मंत्री ने कहा कि पोटा केबिन कलेक्टर की देखरेख में संचालित होते हैं और प्रशासन की लगातार निगरानी रहती है. उन्होंने यह भी कहा कि मामला संदिग्ध है और स्थानीय कलेक्टर के निर्देश पर इसकी जांच कराई जा रही है. जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.हालांकि मंत्री के जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ. आसंदी द्वारा स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य किए जाने के बाद विपक्षी विधायकों ने विरोध जताते हुए सदन से बहिर्गमन कर दिया.
हालांकि मंत्री के जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ. आसंदी द्वारा स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य किए जाने के बाद विपक्षी विधायकों ने विरोध जताते हुए सदन से बहिर्गमन कर दिया.
