बलरामपुर. छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में कांग्रेस संगठन के भीतर कार्यकारिणी गठन के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है. नई जिला कार्यकारिणी घोषित होते ही पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है. हालात यह हैं कि कांग्रेस की नवनियुक्त जिला उपाध्यक्ष, जिला महामंत्री, तीन जिला सचिव सहित कुल 11 पदाधिकारियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इस घटनाक्रम के बाद जिले की कांग्रेस राजनीति में उबाल आ गया है.
इस्तीफों के बाद कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरिहर यादव लगातार भाजपा पर आरोप लगाते हुए इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं. हालांकि इस पूरे मामले में अब भाजपा ने भी पलटवार करते हुए कांग्रेस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. भाजपा का कहना है कि कांग्रेस को परिवारवाद छोड़कर जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को अवसर देना चाहिए, अन्यथा संगठन का बचा-खुचा ढांचा भी बिखर सकता है.
दरअसल, कार्यकारिणी गठन के साथ ही कांग्रेस के अंदर कई फैसलों को लेकर असंतोष पनपने लगा था. पार्टी के भीतर से ही यह सवाल उठने लगे थे कि वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के बावजूद एक युवा नेता को बलरामपुर ब्लॉक का अध्यक्ष बना दिया गया, जिस पर पहले से ही पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं. इसके साथ ही परिवारवाद को लेकर भी चर्चा तेज हो गई थी.

विवाद उस समय और बढ़ गया जब त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान बूथ कैप्चरिंग के मामले में आरोपित रहे प्रशांत विश्वास उर्फ छोटू बंगाली को जिला उपाध्यक्ष का पद दे दिया गया. वर्ष 2020 के पंचायत चुनाव के दौरान सागरपुर गांव में मतदान से पहले बूथ कैप्चरिंग का मामला सामने आया था, जिसमें प्रशांत विश्वास का नाम प्रमुखता से सामने आया था. पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी और उनकी गिरफ्तारी भी हुई थी. बाद में उन्हें जिला बदर की कार्रवाई का सामना भी करना पड़ा और एक वर्ष तक जिले से बाहर रहना पड़ा था. ऐसे में पार्टी के भीतर कई नेताओं को उनका शीर्ष पद पर पहुंचना अखर गया.

कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार इस्तीफों की असली वजह सिर्फ कार्यकारिणी सूची नहीं है, बल्कि लंबे समय से चल रही गुटबाजी भी है. जिले में कांग्रेस अलग-अलग खेमों में बंटी हुई बताई जा रही है. एक धड़ा पूर्व विधायक बृहस्पत सिंह से जुड़ा माना जाता है, जबकि दूसरा धड़ा पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव समर्थकों का बताया जा रहा है. दोनों खेमों से जुड़े कई नेताओं के इस्तीफे सामने आने के बाद यह अंदरूनी खींचतान अब सार्वजनिक हो गई है.
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, तब संगठन के कई नेता सत्ता का लाभ लेते हुए सक्रिय दिखाई देते थे. लेकिन अब परिस्थितियां बदलने के बाद संगठन में असंतोष और नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। नई कार्यकारिणी में कई पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं को जगह नहीं मिलने से भी नाराजगी बढ़ी है.
इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारतीय जनता पार्टी ने भी कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है. भाजपा छत्तीसगढ़ ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट जारी करते हुए लिखा कि कांग्रेस की राजनीति का असली चेहरा एक बार फिर सामने आ गया है. भाजपा ने आरोप लगाया कि जिस व्यक्ति को कानून ने जिला बदर घोषित किया और जिस पर हिस्ट्रीशीटर होने का दाग है, उसी प्रशांत विश्वास उर्फ छोटू बंगाली को कांग्रेस ने बलरामपुर का जिला उपाध्यक्ष बना दिया.

भाजपा ने अपने पोस्ट में कहा कि यह फैसला कांग्रेस की सोच और चरित्र को उजागर करता है. पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ऐसे लोगों को आगे बढ़ाने का काम कर रही है जिनका नाम अपराध से जुड़ा रहा है. भाजपा ने यह भी कहा कि इससे साफ है कि कांग्रेस के राजनीतिक डीएनए में अपराधियों को संरक्षण देने की प्रवृत्ति शामिल हो चुकी है.
फिलहाल बलरामपुर कांग्रेस में शुरू हुआ यह विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है. लगातार सामने आ रहे इस्तीफों और आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी संगठन इस संकट से कैसे उबरता है और आने वाले चुनावों में इसका क्या असर पड़ता है.
