रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को प्रश्नकाल के दौरान कोरबा जिले में अमानक चावल की खरीद का मामला गरमा गया. विपक्ष ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की. हालांकि खाद्य मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी विधायकों ने विरोध स्वरूप सदन से बहिर्गमन कर दिया.
मामला उठाते हुए व्यास कश्यप ने सरकार से पूछा कि कोरबा जिले में आखिर कितनी मात्रा में अमानक चावल खरीदा गया और उसकी अनुमानित कीमत क्या है. उन्होंने कहा कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के माध्यम से हुई इस खरीद में किन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है और उनके खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है. उन्होंने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि इसका सीधा असर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और आम जनता को मिलने वाले खाद्यान्न की गुणवत्ता पर पड़ सकता है.
जवाब में खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने बताया कि जांच में सामने आया है कि कोरबा जिले में 8 हजार क्विंटल से अधिक अमानक चावल खरीदा गया था. मंत्री के अनुसार इस चावल की अनुमानित कीमत करीब 3 करोड़ 34 लाख रुपये आंकी गई है. उन्होंने बताया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारी प्रमोद जांगड़े को निलंबित कर दिया गया है, वहीं विभागीय स्तर पर अन्य कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी तय की जा रही है.
इस दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने मंत्री से पूछा कि संबंधित अधिकारी को कब निलंबित किया गया और जांच की वर्तमान स्थिति क्या है. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता जरूरी है ताकि जनता को भरोसा मिल सके कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो रही है.
मंत्री ने बताया कि मामले की जांच के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) से भी परीक्षण कराया गया है. इसके साथ ही विभाग ने अलग से एक जांच दल का गठन किया है, जो पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहा है. मंत्री के अनुसार अब तक दो कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है, जबकि दस अन्य कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और विभागीय जांच जारी है.
हालांकि मंत्री के जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ. कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि मामले में असली दोषियों को बचाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में अमानक चावल की खरीद गंभीर अनियमितता है और इसकी निष्पक्ष तथा उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए. इस मुद्दे पर विपक्षी विधायकों ने सदन में नारेबाजी भी की, जिससे कुछ समय के लिए हंगामे की स्थिति बन गई. अंततः विरोध दर्ज कराते हुए विपक्षी सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन कर दिया.
