जांजगीर-चांपा. जाज्वलयदेव लोक महोत्सव, जो कला और संस्कृति का प्रतीक माना जाता है. इस बार नगर पालिका की कथित अवैध वसूली के कारण विवादों में घिर गया है. आरोप है कि नगर पालिका अधिकारियों के निर्देश पर कर्मचारियों द्वारा मेले में दुकान लगाने वाले छोटे-बड़े दुकानदारों से 500 रुपये से लेकर 5 हजार रुपये तक की वसूली की जा रही है.
दुकानदारों का कहना है कि, यह तीन दिवसीय मेला उनके लिए साल भर की कमाई का एक बड़ा अवसर होता है, लेकिन इस बार सफाई शुल्क के नाम पर जबरन रसीद काटकर पैसे लिए जा रहे हैं. सवाल यह है कि जो छोटे व्यापारी तीन दिन में मुश्किल से अपनी लागत निकाल पाते हैं, वे आखिर इतना भारी शुल्क कैसे वहन करेंगे?
एक दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम यहां परिवार चलाने के लिए दुकान लगाते हैं. तीन दिन में क्या कमाएंगे और क्या टैक्स देंगे? नगर पालिका के कर्मचारी बिना पैसे लिए दुकान लगाने नहीं दे रहे.”
नगर पालिका अधिकारी का कहना है कि यह वसूली सफाई व्यवस्था के लिए की जा रही है और रसीद काटी जा रही है, लेकिन दुकानदारों का आरोप है कि राशि तय मानकों से अधिक ली जा रही है और पारदर्शिता का अभाव है.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन को इस पूरे मामले की जानकारी है? यदि हां, तो कार्रवाई क्यों नहीं? और यदि नहीं, तो यह प्रशासनिक लापरवाही नहीं तो और क्या है?
महोत्सव, जो कलाकारों, किसान और स्थानीय व्यापारियों के लिए खुशियों का अवसर होना चाहिए था. वह अब विवाद और आक्रोश का कारण बनता जा रहा है. दुकानदारों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर अवैध वसूली पर रोक लगाने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है.
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में जांच कर सख्त कदम उठाता है या फिर छोटे दुकानदारों की आवाज यूं ही दबा दी जाएगी.
