बस्तर. छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सल उन्मूलन को लेकर सुरक्षाबलों का सबसे बड़ा और निर्णायक अभियान अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है. अबूझमाड़ और नेशनल पार्क जैसे दुर्गम इलाकों में हजारों जवान लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं. लक्ष्य साफ है 31 मार्च तक बस्तर को वामपंथी उग्रवाद से पूरी तरह मुक्त करना. जंगलों में संभावित ठिकानों पर दबिश के साथ ही पुलिस और नक्सलियों के परिजन भी लगातार आत्मसमर्पण की अपील कर रहे हैं.
सूत्रों के मुताबिक अब सुरक्षाबलों के निशाने पर गिने-चुने नक्सली ही बचे हैं. इनमें 2 सेंट्रल कमेटी मेंबर समेत टॉप 10 मोस्ट वांटेड नक्सली और उनके करीब 50 हथियारबंद साथी शामिल हैं. मिशन 2026 के समापन में महज कुछ दिन बाकी हैं, ऐसे में बस्तर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पूरी आक्रामकता और हाई अलर्ट मोड में काम कर रही हैं. अंतिम चरण में इन कैडरों पर दबाव बढ़ाने के साथ उन्हें सरेंडर के लिए प्रेरित करने की रणनीति पर भी जोर दिया जा रहा है.
इन वांछित नक्सलियों पर छत्तीसगढ़ में ही 3 करोड़ रुपये से ज्यादा का इनाम घोषित है. सबसे ऊपर नाम आता है 1 करोड़ के इनामी पोलित ब्यूरो सदस्य और सेंट्रल कमेटी सलाहकार मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति का. इसके अलावा पोलित ब्यूरो मेंबर मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर भी सूची में प्रमुख है, जिस पर छत्तीसगढ़ में 40 लाख का इनाम घोषित है.
बस्तर क्षेत्र के अन्य बड़े इनामी नक्सलियों में दक्षिण सब जोनल ब्यूरो प्रमुख पापाराव कुड़म उर्फ मंगू दादा और पीएलजीए बटालियन से जुड़े केसा सोढ़ी शामिल हैं, जिन पर 40-40 लाख रुपये का इनाम है. वहीं मिलिट्री कमांडर हेमला विज्जा और एरिया कमेटी सचिव चंदर कतलाम पर 8-8 लाख का इनाम घोषित है. इसके अलावा कई एरिया कमेटी मेंबर और कमांडर भी सुरक्षाबलों की हिट लिस्ट में हैं, जिनकी कुल संख्या करीब 50 बताई जा रही है.
बस्तर आईजी सुंदरराज पट्टलिंगम ने स्पष्ट किया कि मिशन 2026 अब निर्णायक मोड़ पर है और इसका लक्ष्य बस्तर से नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया करना है. उन्होंने कहा कि बस्तर पुलिस, डीआरजी, एसटीएफ, CRPF, BSF, ITBP सहित सभी सुरक्षाबलों के समन्वित और खुफिया आधारित ऑपरेशनों ने माओवादी नेटवर्क को गहराई तक कमजोर कर दिया है. साथ ही प्रभावी आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के चलते बड़ी संख्या में नक्सली मुख्यधारा में लौट चुके हैं, जिससे संगठन की रीढ़ लगभग टूट चुकी है.
अब नजर 31 मार्च की डेडलाइन पर टिकी है, जहां बस्तर में नक्सलवाद के अंत की कहानी लिखने की तैयारी पूरी हो चुकी है.
