बलरामपुर. देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले किसान आज खुद अपने ही खाते की सच्चाई साबित करने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं. छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले की जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, रामानुजगंज शाखा एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है. बैंक पर गंभीर आरोप लगाते हुए किसानों ने प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं.
जानकारी के अनुसार, ग्राम आरगाही निवासी किसान ब्रह्मदेव के बैंक खाते में तीन लाख रुपये का बकाया ऋण दर्ज दिखाया जा रहा है. किसान का कहना है कि उन्होंने कभी ऐसा कोई ऋण लिया ही नहीं, बावजूद इसके उनके खाते में कर्जदार दर्शाया जा रहा है. इस कथित फर्जी ऋण के चलते किसान न तो धान बेच पा रहे हैं और न ही खाते से अपनी जमा राशि निकाल पा रहे हैं. परेशान किसान ने मामले को गंभीर बताते हुए पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है.
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ब्रह्मदेव ने बताया कि उनके पिता की तबीयत लगातार खराब रहती है, लेकिन खाते में ऋण दर्ज होने के कारण वे इलाज के लिए पैसे तक नहीं निकाल पा रहे. बच्चों की स्कूल फीस भी अटक गई है. किसान का आरोप है कि मदद करने के बजाय बैंक के कर्मचारी उनके साथ अभद्र व्यवहार कर रहे हैं. सवाल यह उठता है कि जब किसान को अपने ही खाते का हिसाब मांगने के लिए संघर्ष करना पड़े, तो बैंकिंग व्यवस्था पर भरोसा आखिर कैसे कायम रह पाएगा?
इसी तरह ग्राम धनपुरी निवासी किसान रामजन्म महतो का मामला भी बैंक की लापरवाही को उजागर करता है. उन्होंने 28 नवंबर 2025 को 20,922 रुपये जमा कर अपना ऋण चुका दिया था. भुगतान की ट्रांजेक्शन संख्या TXN733330032622 भी दर्ज है. इसके बावजूद 8 जनवरी 2026 को धान खरीदी की राशि से फिर से 20,922 रुपये काट लिए गए. बाद में 13 जनवरी 2026 को इसकी रसीद भी जारी कर दी गई.
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रामजन्म महतो का कहना है कि यदि उन्होंने खुद रसीद और खाते का मिलान नहीं किया होता तो यह राशि स्थायी रूप से कट जाती और उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं मिलती. यह घटना बैंक की आंतरिक समन्वय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करती है.
कुछ दिन पहले किसान उमेश यादव ने वीडियो जारी कर बताया था कि उनके पिता जोगी यादव गंभीर किडनी बीमारी से पीड़ित हैं. इलाज के लिए धन की आवश्यकता थी, लेकिन बैंक से राशि निकालने में उन्हें परेशानी झेलनी पड़ी. उमेश यादव का आरोप है कि चेकबुक जारी नहीं होने के कारण उन्हें पैसे नहीं मिले. कई बार आवेदन देने के बाद भी बैंक ने आवेदन निरस्त कर दिया, जिससे समय पर इलाज प्रभावित हुआ. इस घटना ने बैंकिंग प्रक्रिया की संवेदनशीलता पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिया है कि क्या जीवनरक्षक उपचार भी अब कागजी औपचारिकताओं में उलझ जाएगा?
गौरतलब है कि रामानुजगंज शाखा का विवादों से पुराना नाता रहा है. वर्ष 2023 में केसीसी से जुड़े करीब 1.33 करोड़ रुपये के गबन का मामला सामने आया था. वहीं 2012 से 2022 के बीच फर्जी खातों के जरिए करीब 26 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच में 11 से अधिक बैंक कर्मियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है.
इस पूरे मामले पर शाखा प्रबंधक लल्लू राम यादव ने सफाई देते हुए कहा कि यह प्रकरण वर्ष 2021-22 से जुड़ा है. कथित फर्जी ऋण का खुलासा वर्ष 2024 में हुआ, जब वसूली नहीं हो सकी. इसके बाद जांच टीम गठित कर मामले को आगे भेज दिया गया है.
