धमतरी. जिले में लगातार बदलते मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. बेमौसम बारिश ने खेतों में खड़ी और कटाई के बाद रखी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसान मायूस नजर आ रहे हैं. हालात को गंभीर देखते हुए प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कृषि, राजस्व और फसल बीमा विभाग की संयुक्त टीमों को मैदान में उतार दिया है, जो अब रोजाना फसल क्षति का आकलन कर रही हैं.
इस वर्ष शासन के मार्गदर्शन में किसानों ने चना समेत अन्य उन्हारी फसलों की बड़े पैमाने पर खेती की थी. जिले के नगरी, कुरूद, मगरलोड और धमतरी ब्लॉकों में राहर, चना, गेहूं, सरसों, तिवरा और तिल की फसलें बोई गई थीं. लेकिन लगातार हो रही बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है. खासकर कटाई के बाद खेतों में रखी फसलें बारिश में भीगकर खराब होने की कगार पर पहुंच गई हैं.
किसानों ने फसल को बचाने के लिए झिल्ली और तिरपाल का सहारा जरूर लिया है, लेकिन मौसम साफ नहीं होने और लगातार नमी बने रहने से फसल के सड़ने का खतरा बढ़ता जा रहा है. धूप नहीं निकलने के कारण फसल को सुखा पाना संभव नहीं हो पा रहा है, जिससे नुकसान की आशंका और गहराती जा रही है. आसमान में छाए काले बादल किसानों की बेचैनी को और बढ़ा रहे हैं.
प्रशासनिक टीमें गांव-गांव पहुंचकर नुकसान का जायजा ले रही हैं और रिपोर्ट तैयार की जा रही है, ताकि प्रभावित किसानों को समय पर राहत मिल सके. हालांकि लगातार हो रहे नुकसान ने किसानों के मन में भविष्य को लेकर संशय भी पैदा कर दिया है, और कई किसान अब अगली बार उन्हारी फसल लगाने को लेकर असमंजस में हैं.
कृषि विभाग के अधिकारी केएस ध्रुव ने बताया कि 16 और 17 मार्च को हुई बारिश से काफी नुकसान हुआ है. फील्ड स्तर के कर्मचारियों को सर्वे के निर्देश दिए गए हैं और फसल बीमा व राजस्व विभाग की टीमें भी सक्रिय रूप से नुकसान का आकलन कर रही हैं. प्रशासन का कहना है कि प्रतिदिन सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है, ताकि प्रभावित किसानों को जल्द राहत प्रदान की जा सके.
