बिलासपुर. छत्तीसगढ़ की राजनीति और न्यायिक गलियारों में वर्षों से गूंज रहे रामावतार जग्गी हत्याकांड में आज बड़ा दिन है. लंबे इंतजार के बाद मामला फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां हाईकोर्ट की स्पेशल डिवीजन बेंच में अंतिम सुनवाई होनी है और सबकी निगाहें CBI की 11 हजार पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट पर टिक गई हैं.
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा की विशेष पीठ इस बहुचर्चित केस की सुनवाई कर रही है. कोर्ट के सामने CBI की जांच रिपोर्ट, पुराने फैसले और सभी पक्षों की दलीलों के आधार पर आज अहम फैसला आने की संभावना जताई जा रही है, जो इस केस की दिशा तय कर सकता है.
इस हाई-प्रोफाइल केस में CBI ने अपनी जांच में कई आरोपियों के साथ अमित जोगी का नाम भी शामिल किया है. इससे पहले हुई सुनवाई में CBI, राज्य सरकार, सतीश जग्गी और अमित जोगी के वकीलों ने अपने-अपने तर्क रखे। हालांकि सुनवाई के दौरान अमित जोगी के वकील ने केस से जुड़ी फाइल न मिलने का हवाला देकर समय मांगा, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए CBI को तत्काल दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए.
यह मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दोबारा हाईकोर्ट में खोला गया है. इससे पहले हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच दोषियों की अपील खारिज कर चुकी थी और आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा गया था. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए मामले को फिर से विस्तृत सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भेज दिया.
करीब दो दशक पुराने इस मामले की जड़ें 4 जून 2003 से जुड़ी हैं, जब NCP नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस केस में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से दो सरकारी गवाह बन गए थे, जबकि 28 आरोपियों को सजा सुनाई गई थी. साल 2007 में विशेष अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
अब जब यह मामला फिर से खुल चुका है, तो पीड़ित पक्ष इसे सुनियोजित साजिश बताते हुए प्रभावशाली लोगों की भूमिका पर सवाल उठा रहा है. वहीं बचाव पक्ष पहले की तरह सबूतों की कमी का तर्क दे रहा है. आज की सुनवाई को इस लंबे और जटिल केस का सबसे अहम पड़ाव माना जा रहा है. अदालत का फैसला न सिर्फ आरोपियों की किस्मत तय करेगा, बल्कि 23 साल से न्याय की राह देख रहे इस मामले को नई दिशा भी देगा.
