बीजापुर। महुआ सीजन के चलते जंगलों में लगाई जा रही आग अब बेकाबू होकर तबाही का कारण बन रही है। जिला मुख्यालय से सटे महादेव घाटी, नेशनल पार्क क्षेत्र और जिले के अधिकांश वन क्षेत्रों में आग धधक रही है, जिससे बड़ी मात्रा में वन संपदा जलकर खाक हो रही है। नेशनल हाईवे किनारे भी कई जगहों पर आग की लपटें तेज़ी से फैलती नजर आ रही हैं, जो हालात की गंभीरता को बयां करती हैं।
उसूर ब्लॉक के पुजारी कांकेर, गलगम, भोपालपटनम के सेंड्रा, सागमेटा, भैरमगढ़, मिरतुर, गंगालूर के तोडक, मनकेली और धुमरा जैसे इलाकों में आग का दायरा लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय ग्रामीण महुआ बीनने में आसानी के लिए सूखे पत्तों को जलाने का सहारा लेते हैं, लेकिन यही छोटी आग अब विकराल रूप लेकर पूरे जंगल को अपनी चपेट में ले रही है।
रात के समय आग की लपटें और भी भयावह दिखाई देती हैं, जिससे आसपास के क्षेत्रों में दहशत का माहौल है। वहीं, वन विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अधिकारियों और फायर वाचर्स की मौजूदगी के बावजूद आग पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। नुक्कड़ नाटक और जागरूकता अभियानों के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं, यहां तक कि वन विभाग कार्यालय के पास लगी आग भी काबू में नहीं लाई जा सकी।
इस पूरे मामले पर बीजापुर के एसडीओ देवेंद्र गौड़ ने बताया कि महुआ सीजन के दौरान आग लगने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। विभाग द्वारा फायर वाचर्स की तैनाती की गई है और ग्रामीणों को जागरूक करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाना चुनौती बना हुआ है।
