जांजगीर-चांपा। जिले में बहुचर्चित सामूहिक दुष्कर्म मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए चारों आरोपियों को 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास और प्रत्येक पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया है। इस फैसले के साथ ही लंबे इंतजार के बाद पीड़िता को न्याय मिल सका और कानून का कड़ा संदेश भी समाज तक पहुंचा।
यह सनसनीखेज वारदात 18 मई 2025 की है, जब थाना चांपा क्षेत्र में एक युवती के साथ चार परिचित युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। आरोपियों ने पहले घर पहुंचकर परिवार के साथ सामान्य व्यवहार किया, लेकिन देर रात युवती के पिता के सो जाने के बाद उसे जबरन दूसरे कमरे में ले जाकर बारी-बारी से दरिंदगी की और मौके से फरार हो गए। घटना के बाद पीड़िता की मां की शिकायत पर पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए निरीक्षक जय प्रकाश गुप्ता के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तेजी से कार्रवाई की। घटनास्थल का फोरेंसिक परीक्षण कराया गया, आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए और साइबर सेल की मदद से मोबाइल लोकेशन के जरिए आरोपियों की मौजूदगी की पुष्टि की गई। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी घटना के बाद नेपाल भागने की फिराक में थे।
पुलिस ने सतर्कता दिखाते हुए कोरबा जिले के करतला क्षेत्र के जंगलों में घेराबंदी कर सभी आरोपियों को धर दबोचा। गिरफ्तार आरोपियों में मनोज कुमार पटेल, नरेंद्र कुमार पटेल, रामकुमार पटेल और धरम चौहान शामिल हैं।
पूरी विवेचना के बाद पुलिस ने मजबूत साक्ष्यों के साथ न्यायालय में चार्जशीट पेश की। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मामले की त्वरित सुनवाई करते हुए सभी आरोपियों को दोषी करार दिया और कठोर सजा सुनाई।
पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय के निर्देशन में हुई इस कार्रवाई ने न केवल पीड़िता को न्याय दिलाया, बल्कि यह भी साबित किया कि सशक्त जांच और त्वरित पुलिस कार्रवाई से गंभीर अपराधों में दोषियों को सजा दिलाना संभव है। इस पूरे मामले में पुलिस टीम के कई अधिकारियों और कर्मचारियों की अहम भूमिका रही, जिनकी मेहनत ने इस केस को अंजाम तक पहुंचाया।
