धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में बेमौसम बदले मौसम ने धान खरीदी व्यवस्था की पोल खोल दी है। समर्थन मूल्य पर खरीदा गया लाखों क्विंटल धान अब भी खुले आसमान के नीचे पड़ा है और अचानक हुई हल्की बारिश ने किसानों और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ा दी है। समय पर उठाव नहीं होने के कारण करीब साढ़े 15 लाख क्विंटल धान बारिश की जद में आ सकता है।
जिले के 100 धान खरीदी केंद्रों में इस सीजन 1 लाख 24 हजार 463 किसानों से कुल 59 लाख 64 हजार 994 क्विंटल धान की खरीदी की गई थी। अब तक मिलरों द्वारा 44 लाख 13 हजार 539 क्विंटल धान का उठाव किया जा चुका है, लेकिन 15 लाख 51 हजार 454 क्विंटल धान अब भी केंद्रों में पड़ा हुआ है। यही धान फिलहाल सबसे ज्यादा जोखिम में है।
23 फरवरी की सुबह मौसम ने अचानक करवट ली। बादल छाए और 10 से 15 मिनट तक हल्की बारिश हुई। हालांकि बारिश ज्यादा देर तक नहीं चली, लेकिन खुले में रखे धान को लेकर अफरा-तफरी मच गई। केंद्र प्रबंधकों ने तुरंत पालीथिन और तिरपाल से धान को ढकने की व्यवस्था की, ताकि बारिश से नुकसान न हो। रुक-रुक कर हो रही बूंदाबांदी ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया।
केवल खरीदी केंद्र ही नहीं, बल्कि संग्रहण केंद्रों में भी एहतियात बढ़ा दी गई है। जंवरगांव, भोयना, भाठागांव और पुरूर संग्रहण केंद्रों में इन दिनों खरीदी केंद्रों से लाकर धान का भंडारण किया जा रहा है। यहां भी धान को सुरक्षित रखने के लिए पालीथिन से ढककर रखा गया है, ताकि भविष्य में यदि तेज बारिश हो तो नुकसान से बचा जा सके।
जिला नोडल अधिकारी बीपी गोस्वामी ने बताया कि मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए सभी केंद्र प्रबंधकों को पहले ही निर्देश जारी कर दिए गए थे। उन्होंने कहा कि जिले के सभी खरीदी और संग्रहण केंद्रों में धान को ढककर सुरक्षित रखा गया है और कहीं से भी धान भीगने की सूचना नहीं मिली है।
हालांकि प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाने का दावा किया है, लेकिन खुले आसमान के नीचे लाखों क्विंटल धान का पड़ा रहना व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। यदि मौसम ने दोबारा करवट ली, तो यह लापरवाही किसानों की मेहनत पर भारी पड़ सकती है।
