बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कलेक्टोरेट परिसर की मल्टीलेवल पार्किंग अब सुविधा से ज्यादा विवाद की वजह बनती जा रही है। पार्किंग स्थल में कथित तौर पर ‘ऑटोडील’ कारोबार चलने के आरोप सामने आते ही सियासी और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे मामले पर कड़ी नाराजगी जताते हुए जिम्मेदारों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग तेज कर दी है।
स्मार्ट सिटी लिमिटेड के तहत संचालित इस पार्किंग को आम लोगों की सुविधा के लिए तैयार किया गया था, लेकिन आरोप है कि यहां वाहनों की पार्किंग के बजाय निजी व्यवसाय को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस मुद्दे पर बुधवार को एमआईसी सदस्यों ने मेयर से जवाब तलब करते हुए साफ कहा कि सार्वजनिक संसाधनों का इस तरह दुरुपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मामले पर सफाई देते हुए स्मार्ट सिटी के जीएम (रेवेन्यू) व नगर निगम के अपर आयुक्त खजांची कुम्हार ने बताया कि पार्किंग का ठेका तीन साल के लिए राजन जायसवाल को दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि परिसर में ऑटोडील जैसी गतिविधियों को तुरंत बंद कराने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जगह का उपयोग केवल पार्किंग के लिए ही हो।
हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर समन्वय की कमी भी सामने आई है। जहां एक ओर जांच की जिम्मेदारी जोन 3 को सौंपे जाने की बात कही गई, वहीं जोन कमिश्नर प्रवीण शुक्ला ने शाम तक किसी भी आधिकारिक आदेश से अनभिज्ञता जताई। इससे पूरे मामले में भ्रम और सवाल दोनों गहरा गए हैं।
इसी बीच स्मार्ट सिटी के जीएम (टेक्निकल) एसपी साहू ने भी ठेकेदार को नोटिस जारी करने की बात कही, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि आदेश कब और किस स्तर से जारी हुआ। प्रशासन की इस अस्पष्टता ने विवाद को और हवा दे दी है।
नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष भरत कश्यप ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि जनता की सुविधा के लिए बनी मल्टीलेवल पार्किंग का दुरुपयोग किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा और निगम प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
फिलहाल, यह मामला शहर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस पूरे विवाद पर क्या ठोस कदम उठाता है और जिम्मेदारों पर कब तक कार्रवाई होती है।
