बलरामपुर.. जिला मुख्यालय से महज 08 किलोमीटर दूर बरदर ग्राम पंचायत में पदस्थ पंचायत सचिव पर वार्ड पंच ने गंभीर आरोप लगाते हुए..कलेक्टर से शिकायत की है..और वर्तमान में पदस्थ सचिव के कार्यकाल में किये गये राशि आहरण की जांच करने की मांग की है!..वही पंचायत के अधिकारियों ने मामले में जांच की बात कही है..हालांकि पंचायत सचिव ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया है!.
बता दे की ग्राम पंचायत बरदर के वार्ड क्रमांक 08 से पंच सुदामा नागवंशी ने कलेक्टर से लिखित शिकायत की है..की है अगस्त 2025 में पंचायत सचिव विष्णुपद मंडल की पदस्थापना बरदर में हुई थी..और पदस्थापना के बाद अगस्त और सितंबर माह में ही ग्राम पंचायत की बैठक का आयोजन सचिव ने किया था..उसके बाद पंचायत में किसी प्रकार की बैठक आयोजित नही की गई..और ना ही बैठक को लेकर सचिव द्वारा सूचना दी गई.. पंच ने सचिव पर आर्थिक अनियमित्ता का आरोप लगाते हुए शिकायत में बताया है कि मां चंडी धाम के पास स्थित सामुदायिक शौचालय में वाटर रनिंग के नामपर 15 वे वित्त से 96 हजार की राशि का आहरण किया है..जबकि सामुदायिक शौचालय में प्लम्बरिंग का कार्य और हैंडपंप पहले से ही था..जिसमें सबमर्सिबल पंप लगाया गया है..अब सवाल यह है कि जब शौचालय में वाटर रनिंग फैसलिटी थी ..तो पूर्व में ही सबमर्सिबल पंप क्यों नहीं लगाया गया !.क्योंकि सामुदायिक शौचालय के साथ ही शौचालय में वाटर रनिंग सिस्टम ,ट्यूवेल, सबमर्सिबल पंप सहित स्वीकृत की जाती है!.

ग्राम पंचायत के पंच ने यह भी आरोप लगाया है की पंचायत सचिव ने गुपचुप तरीके से प्रस्ताव तैयार कर मूलभूत की राशि आंगनबाड़ी भवन के निर्माण में लगा दी है..इसके साथ ही माह अगस्त 2025 से फरवरी 2026 तक पंचायत प्रस्ताव के माध्यम से किये गये समस्त आहरण की जांच की मांग की है!.
वही पंचायत सचिव विष्णुपद मंडल का कहना है कि उनके विरुद्ध लगाये गये आरोप निराधार है..इधर जनपद सीईओ दीपराज कांत का कहना है की पंचायत प्रतिनिधि द्वारा जो शिकायत की गई उसकी जांच करवायी जाएगी..और जांच के बाद जो तथ्य सामने आएंगे उसके मुताबिक कार्यवाही की जाएगी!.
दरअसल, पंचायत प्रस्ताव में पारित कार्ययोजना के आधार पर पंचायत को आबंटित राशि खर्च की जाती है..और पारदर्शिता बनी रहे इस उद्देश्य से विकास कार्यों के सूचना पटल भी लगाये जाते है..लेकिन आपस में पारदर्शिता ना हो तो ऐसी स्थितियां निर्मित होती है..जिसका असर गांव के विकास कार्यों पर भी पड़ता है..ऐसे में 17 फरवरी को कलेक्टर से की गई शिकायत में आर्थिक अनियमित्ता के मामले में स्थानीय प्रशासन कितनी गंभीरता से जांच और कार्यवाही करेगी यह देखने वाली बात होगी!.
