बलरामपुर..(कृष्णमोहन कुमार)..18 जनवरी को पड़ोसी राज्य झारखंड में हुए सड़क हादसे में 10 लोगों की सांसे थम गई. मृतक सभी 10 लोग बलरामपुर जिले के निवासी थे. इस हादसे में 70 से अधिक लोग घायल है. मृतकों का गमगीन महौल में दाह संस्कार कर दिया गया है. जबकि घायलों का अलग-अलग अस्पतालों में उपचार जारी है.
पुलिस घटनाक्रम की जांच में जुटी है, लेकिन इस घटना का सबसे अहम पहलू यह है कि आखिर जिले के दो से तीन थाना क्षेत्रों से ग्रामीणों को ठूंस कर जब स्कूल बस गुजरी तब कार्यवाही क्यों नहीं की गई. आखिर स्कूल बस को एक राज्य से दूसरे राज्य गैर शिक्षकीय कार्य के लिये ले जाने किसने परमिट दे दी. इन सब चीजों का अगर पहले ध्यान रखा गया होता तो यह गंभीर हादसा ना हुआ होता.
खैर अब किसी पर दोष मढ़ने से कोई फायदा नही है, क्योंकि जिसका जो खोना था वह तो खो ही गया. लेकिन ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो इसे लेकर प्रशासन को सजग रहना होगा. खासकर ऐसे समय में जब सड़क सुरक्षा माह चल रहा हो. अधिकारियों को रील से हटकर रियल में जागरूकता फैलाने की जरूरत है.
छत्तीसगढ़-झारखंड के सरहदी इलाके ओरसा पाठ में 17 जनवरी को भी आम दिनों की तरह ही लोगों का आवागमन हो रहा था, लेकिन दोपहर 2 से 3 बजे के बीच ऐसा हादसा हुआ कि, झारखंड और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों सरकारों ने अपनी संवेदनाएं प्रकट की और फौरी तौर पर राहत व बचाव कार्य शुरू किए गये.
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने इस बस हादसे में घायलों को 50-50 हजार और मृतकों को 5-5 लाख रुपए के मुआवजे की घोषणा की. जाहिर बस में सवार सभी छत्तीसगढ़ के निवासी थे. तो छत्तीसगढ़ सरकार ने संवेदनशीलता का परिचय दिया. चूंकि दुर्घटना झारखंड के महुआडांड थाना क्षेत्र में हुई थी. तो झारखंड सरकार ने भी अपनी कार्य कुशलता का निर्वहन जिम्मेदारी से की.
अब बात बलरामपुर जिले की राज्य में सड़क सुरक्षा माह चल रहा है. बड़े-बड़े होर्डिंग्स बैनर पोस्टर के माध्यम से जागरूकता अभियान का दावा किया जा रहा है, लेकिन उसके विपरीत एक निजी स्कूल की बस 80 से अधिक ग्रामीणों को लेकर जिले के 2 से 3 थाना क्षेत्रों से गुजरती है और सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का दावा करने वाली पुलिस की नजरों से बस ओझल हो जाती है.
स्कूल बस शिक्षकीय कार्य के लिये उपयोग में लायी जाती है. उसका फिटनेस भी समय-समय पर परिवहन विभाग के द्वारा चेक किया जाना अनिवार्य है. ऐसे में बगैर परमिट वाली बस दूसरे राज्य में प्रवेश कर जाती है, और उसका ब्रेक फेल होने की वजह से हादसा हो जाता है. इसका सीधा सा मतलब है, जिम्मेदारों ने अपनी जिम्मेदारियों का अच्छी तरह से निर्वहन नही किया. लेकिन अब सवाल यह है कि निजी स्कूल प्रबंधन पर प्रशासन कार्यवाही करेगा या फिर माननीयों के निर्देशों की प्रतिक्षा का क्रम जारी रखेगा.
