Investigation....! Collector made distance from media...
Sanjay Yadav
Published: July 3, 2023 | Updated: July 3, 2023 1 minute read
जांजगीर-चांपा (संजय यादव)…संवादहीनता जिले के विकास में बाधा बन रही हैं। जिससे सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आमजन तक नही पहुँच रही हैं। कलेक्टर ऋचा प्रकाश चौधरी ने पूरी तरह जिले की मीडिया से दूरी बना ली हैं। मीडिया को किसी भी मामले में जानकारी देने से आनाकानी करती हैं। नगर की समस्याओं से उन्हें कोई लेना देना नही हैं। शहर में इन दिनों दर्जनों राज्य व केन्द्र सरकार के निर्माण कार्य चल रहे हैं। जिसमे भारी अनिमितता सामने आई हैं। बाउजूद किसी प्रकार की कार्यवाही नही की जा रही हैं। जिससे शहर के जनता में आक्रोश देखने को मिल रहा हैं। वही निर्माण कार्यो मे सरकार के पैसे का दुरुपयोग हो रहा हैं। जिस अधिकारी के पास जिले की जिम्मेदारी होती हैं। उनको हर वर्ग के लोगो से साथ सामंजस्य बना कर जिले के विकास के लिए काम करना होता हैं। लेकिन, यहां उल्टा काम हो रहा हैं।
राजा बिगाड़ेंगे महंत का खेल….
सक्ति विधानसभा के विधायक डॉ चरण दास महन्त के लिए सक्ति राजा सुरेन्द्र बहादुर सिंह गले की हड्डी बने हुए हैं। आपसी मनमुटाव के कारण दोनों में दूरिया बड़ गई हैं। जिसका असर अब विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा। पिछले विधानसभा में किसी तरह राजा को मना लेने का परिणाम भी डॉ महंत को मिला था। इस बार दोनो के बीच वर्जस्व की लड़ाई होगी। राजा के दत्तक पुत्र राजा धर्मेन्द्र सिंह भी चुनावी मैदान में उतरने को तैयार हैं। तो वही डॉ महंत भी अपने पुत्र सूरज महंत को भी राजनीति उत्ताधिकारी के रूप में तैयार कर रहे हैं।इसलिए राजा सुरेंद्र बहादुर सिंह को हल्के में लेना ठीक नही होगा।
केशव को केडर वोट का डर…
जैजैपुर विधानसभा में दो बार के विधायक रहे बसपा के वरिष्ठ नेता केशव चन्द्रा को इस बार अपने विधानसभा के परंपरागत वोटर के फिसलने का डर सताने लगा हैं। क्योंकि, इस विधानसभा में बसपा का केडर वोट ही विधायक के लिए संजीवनी साबित होते आया हैं। इस बार मामला कुछ अलग ही चल रहा हैं। बताया जा रहा हैं कि इस बार बीएसपी के कुछ कार्यकर्ता एवं नेता केशव चन्द्रा से नाराज चल रहे। वही इस बार बीएसपी अकेले चुनाव लड़ने जा रही हैं। कांग्रेस भी इस बार जैजैपुर विधायक की हैट्रिक को नाकाम करने में लगी हुई हैं। दो पंचवर्षीय में केशव चंद्रा को दमदार प्रत्याशी नहीं मिलने के कारण चुनाव में इसका सीधा लाभ मिला था। जिसका परिणाम दो बार विधायक बनने का मौका मिल गया। लेकिन, इस बार चौतरफा चुनौती मिल रहा हैं। जिसको लेकर अब केशव चंद्रा के मन में डर सताने लगा हैं। कही उनके कैडर वोट फिसल ना जाए जिसको लेकर अब साधने में लगे हुए।
नेता प्रतिपक्ष बनते चुनाव हार जाते हैं नेता…
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता टी एस बाबा ही एक ऐसा अपवाद रहे हैं। जो नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद जीत हासिल किए थे। लेकिन, छत्तीसगढ की राजनीति में देखा गया है कि नेता प्रतिपक्ष का पद मिलने के बाद का चुनाव में हार गए हैं। छत्तीसगढ़ के संदर्भ में ऐसा कहा जाता हैं कि, नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद विधायकी की कुर्सी चली जाती हैं। जांजगीर-चांपा विधायक नारायण चंदेल के नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद लोग यही चर्चा करने में लगे हैं कि कही नेता जी की कुर्सी भी न फिसल ना जाए।
आप पार्टी की दखल…
छत्तीसगढ़ में आम आदमी पार्टी की दखल एवं जिस तरह बिलासपुर में दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की सभा में भीड़ देखने को मिला हैं। उस हिसाब से इस बार आप पार्टी की दखल अन्य पार्टियों के नेताओं की टेंशन बढ़ा दी हैं। वहीं इस बार विधानसभा चुनाव में कुछ नया देखने को भी मिल सकता हैं। हो सकता है इस बार आप पार्टी अपना खाता छत्तीसगढ़ में भी खोल दे। क्योंकि, जिस तरह आप पार्टी के कार्यकर्ताओं नेताओं द्वारा रणनीति बनाकर विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे उसमें कांग्रेसी एवं बीजेपी के कई सीट खिसकने की खबर आ रही हैं।
कांग्रेस की 10 हजार वाली कुर्सी….
कांग्रेस पार्टी ने इस बार कार्यकर्ता सम्मेलन में चंदा जुटाने का नया तरीका निजात किया था। जांजगीर में विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए कार्यकर्ता सम्मेलन में नए प्रयोग किए गए। जिले के विधानसभा चुनाव मे दावेदारी करने वालों नेताओं के लिए कार्यक्रम में अलग से कुर्सी लगाई गई थी। जिसमें बैठने की कीमत 10 हजार रखी गई थी। बताया गया कि, अगर किसी को विधानसभा में दावेदारी में अपना नाम लिखाना है तो वह 10 हजार पार्टी को देकर इस कुर्सी में बैठ सकते हैं। इस तरह यह नया प्रयोग लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। इस प्रयोग से कांग्रेस के पास फंड भी आ गया और दावेदारों का चेहरा भी सामने आ गया।