CG में भर्राशाही : कानून के रखवाले ही तोड़ रहे नियम… 25 नाबालिको को घंटों थाने में बैठाकर बच्चों के नाम से काटे चालान.. रोड़ में रोककर लुटे चाबी… यातायात व्यवस्था बनाने के बजाय कर रहे अवैध वसूली… टीआई रैंक के अधिकारी को मिला प्रभार…

जांजगीर-चांपा/संजय यादव. जिला मुख्यालय में इन दिनों यातायात विभाग में खूब नियम कायदे तोड़े जा रहे हैं। यहां यातायात व्यवस्था को बनाने के नाम पर अवैध वसूली से लेकर आम लोगों से दुर्व्यवहार किया जा रहा है। यातायात नियम कायदों से अनभिज्ञ रक्षित निरीक्षक को यातायात का प्रभारी बनाया गया है। वही प्रभारी के निर्देशानुसार यातायात आरक्षक आम लोगों से दुर्व्यवहार कर नाबालिगों को रोड में रुकवा कर गाड़ी का चाबी को छीन ले रहे हैं। खुलेआम महिलाओं को चौक चौराहों में रोककर दुर्व्यवहार कर अनाप-शनाप बातें भी करते हैं। बुधवार को यातायात विभाग ने अलग-अलग जगहों पर पॉइंट लगाकर नाबालिक बच्चों को गाड़ी चलाने से रोका गया। वही रोक कर थाने में बुलाकर घंटों बैठा रहे हैं। नाबालिगों के नाम चालान काटा गया जो मोटर व्हीकल एक्ट के नियम विरुद्ध है। किसी भी नाबालिग को घंटों थाने में बुलाकर बैठाना एवं उनके नाम पर चालान काटना कानूनन गलत है। बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने दर्जनों नाबालिक को थाने बुलाकर उनके नाम पर चालान काटा है। वही उनके पालकों से भी दुर्व्यवहार किया गया है। सभी बच्चों से 2000 का चालान बच्चों के नाम से काटा गया। जबकि मोटर व्हीकल एक्ट में प्रावधान है कि बच्चों के नाम पर किसी तरह की कारवाही नहीं कर उनके अभिभावक के खिलाफ कार्यवाही करना है। बुधवार को जब अभिभावक अपने बच्चों को लेकर गाड़ी छुड़वाने थाने पहुंचे। तो वहां अभिभावकों ने नियमों का हवाला देते हुए यातायात प्रभारी व एसडीओपी चांपा की मौजूदगी में खूब खरी-खोटी सुनाई। वही यातायात आरक्षकों के खिलाफ कार्यवाही करने की बात कही, तब जाकर यातायात विभाग के अधिकारियों को अपनी गलती का एहसास हुआ और अभिभावकों से माफी मांगने लगे। वहीं दर्जनों बच्चों को बिना चालान काटे छोड़ा गया।

चौक चौराहा पर यातायात व्यवस्था बनाने के बजाय मोबाइल में करते रहते हैं बातचीत

जिन यातायात आरक्षकों की ड्यूटी चौक चौराहों पर लगी रहती है। वहां आरक्षक यातायात व्यवस्था बनाने के बजाय दिनभर मोबाइल में ही बतियाते रहते हैं। ऐसे कई मामले सामने आए जहां आरक्षक ड्यूटी करने के बजाय एक जगह बैठे रहते हैं। वही मौका देखते ही ग्रामीणों एवं बच्चों को अपना शिकार बनाते हैं। 2 सौ, 5 सौ की अवैध वसूली कर अपनी जेब भरते हैं। यह कोई एक या दो दिन की बात नहीं है। रोजाना हर एक चौक चौराहों पर यातायात के आरक्षक अवैध वसूली को अंजाम देते हैं।

दो टीआई रैंक के अधिकारियों के भरोसे यातायात विभाग

इन दिनों यातायात विभाग का कोई माई बाप नहीं है। यहां दो टीआई रैंक के अधिकारी के बदौलत पूरे जिले में यातायात विभाग संचालित हो रही है। वही नियम के विरुद्ध चौक चौराहों पर सिर्फ एसआई एवं दो आरक्षक के बदौलत अवैध वसूली को अंजाम देते हैं। मोटर व्हीकल एक्ट में साफ प्रावधान है कि कोई भी डीएसपी रैंक के अधिकारी मौके पर रह कर कार्यवाही को अंजाम दे सकते हैं लेकिन यहां यातायात के आरक्षक नियम कानून को साइड में रख एसआई एवं यातायात के आरक्षक मिलकर चौक चौराहों एवं शहर के आउटर में रोज अवैध वसूली कर ग्रामीणों एवं आम लोगों को परेशान करते नजर आते हैं। वही अनाप-शनाप चालान भी काटते हैं।

जांजगीर चांपा यातायात पुलिस की कार्रवाई

25 नाबालिक वाहन चालकों के विरुद्ध की गई कार्यवाही।

10 नाबालिक वाहन चालकों के पालक आने पर किया जावेगा पृथक से कार्यवाही।

मोटरयान अधिनियम के विभिन्न धाराओं के तहत 61 वाहनों पर चालानी कार्यवाही किया गया।

वाहन चालकों से कुल 60800/- रूपये लिया गया समन शुल्क।

नाबालिक के द्वारा वाहन चलाने के 25 प्रकरण में 5 हजार।

नम्बर अस्पष्ट होने के 01 प्रकरण में 300/-, मोटर साइकिल में तीन सवारी चलने के 04 प्रकरण में 1200/- , रिफ्लेक्टर नही होने के 27 प्रकरण मे 8100/- कार्यवाही के साथ अन्य धाराओं कार्यवाही किया गया। 

मोटर ह्वीकल संशोधन विधेयक में नाबालिगों द्वारा किए गए अपराध के लिए अब अभिभावक या वाहन मालिक को दोषी माना जाएगा। इसके लिए 25 हज़ार रुपये का जुर्माना या तीन साल की जेल की सज़ा का प्रावधान किया गया है।

विधेयक में किए गए प्रावधान

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सीट बेल्ट न लगाने पर 100 रुपये की जगह 1000 रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

  • हेलमेट नहीं होने पर 100 रुपये की जगह 1000 रुपये का जुर्माना और तीन महीने तक लाइसेंस कैसिल कर दिया जाएगा.
  • आपतकालीन वाहनों (एंबुलेंस आदि) का रास्ता रोकने पर अब तक कोई जुर्माना नहीं है. विधेयक में इसके लिए 10 हजार रुपये का जुर्माना या छह महीने की जेल या दोनों की सजा का प्रावधान किया गया है.
  • बिना लाइसेंस गाड़ी चलाने पर 500 रुपये का जुर्माना या तीन महीने की जेल अथवा दोनों का प्रावधान है. नए विधेयक में पांच हजार रुपये का जुर्माना या तीन महीने की जेल अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है. यह गलती दोहराने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना या एक साल की जेल अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है.
  • अयोग्य होने के बावजूद गाड़ी चलाने पर 500 रुपये का जुर्माना या तीन महीने की जेल अथवा दोनों का प्रावधान है. इसे बढ़ाकर 10 हजार रुपये का जुर्माना या तीन महीने की जेल अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है.
  • तेज गाड़ी चलाने या रेस करने पर 500 रुपये का जुर्माना या तीन महीने की जेल अथवा दोनों का प्रावधान है. इसे बढ़ाकर पांच हजार रुपये का जुर्माना या तीन महीने की जेल अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है. इस अपराध को दोहराने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना या एक साल की सजा अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है.

नाबालिगों द्वारा किए गए अपराध पर अभिभावक या वाहन मालिक होंगे दोषी

नाबालिगों द्वारा किए गए अपराध पर अब तक सजा या जुर्माने का प्रावधान नहीं है. विधेयक में अब इसके लिए अभिभावक या वाहन मालिक को दोषी माना जाएगा. इसके लिए 25 हजार रुपये का जुर्माना या तीन साल की जेल की सजा का प्रावधान किया गया है. एक साल तक वाहन का रजिस्ट्रेशन कैंसिल कर दिया जाएगा और नाबालिग को 25 साल का होने तक ड्राइविंग लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा.

शराब पीकर गाड़ी चलाना

पहली बार शराब पीकर गाड़ी चलाने पर दो हजार रुपये का जुर्माना या छह महीने की जेल अथवा दोनों का प्रावधान है. इसे दोहराने पर तीन हजार रुपये का जुर्माना या दो साल की जेल अथवा दोनों का प्रावधान है.

संशोधन के बाद पहली बार अपराध करने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना या छह महीने की जेल अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है और अपराध को दोहराने पर 15 हजार रुपये का जुर्माना या दो साल महीने की जेल अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है.

ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन

ट्रैफिक लाइट और नियमों का उल्लंघन, फोन पर बात करते हुए ड्राइविंग और गलत तरीके से ओवरटेक करने पर अब तक एक हजार रुपये का जुर्माना और या छह महीने की जेल अथवा दोनों का प्रावधान है. इसे दोहराने पर दो हजार रुपये का जुर्माना या दो साल की जेल अथवा दोनों का प्रावधान है.

नए विधेयक में इस अपराध के लिए पांच हजार रुपये का जुर्माना या छह से 12 महीने की सजा या दोनों का प्रावधान किया गया है. दोबारा यही गलती होने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना या दो साल की जेल या दोनों का प्रावधान किया गया है.