जांजगीर-चांपा. शिवरीनारायण मेले में नियमों की धज्जियां खुलेआम उड़ाई जा रही है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिबंध के बावजूद मेले में ‘मौत का कुआं’ जैसे खतरनाक खेल धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है.
हैरानी की बात यह है कि जहां एक ओर इस तरह के जानलेवा खेलों पर प्रशासन आंख मूंदे बैठा है, वहीं दूसरी ओर छोटे-मोटे रोड इंटेंट और मामूली मामलों में त्वरित कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी पूरी करने का दिखावा किया जा रहा है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि ‘मौत का कुआं’ में न तो सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है और न ही दर्शकों की सुरक्षा को लेकर कोई व्यवस्था है. ऐसे में किसी भी वक्त बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.
प्रशासन की यह लापरवाही कई सवाल खड़े कर रही है. क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा प्रशासन? या फिर नियम सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेंगे? अब देखना यह है कि जिला प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए समय रहते कार्रवाई करता है या किसी अनहोनी का इंतजार किया जाएगा.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की यह चुप्पी किसी बड़ी अनहोनी को न्योता दे रही है. क्या प्रशासन किसी मौत के बाद हरकत में आएगा? क्या नियम सिर्फ आम जनता के लिए हैं, मेले के ठेकेदारों के लिए नहीं? शिवरीनारायण मेले में चल रहा ‘मौत का कुआं’ अब सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का जिंदा उदाहरण बन चुका है.
