जांजगीर-चांपा. जिले के नवागढ़ ब्लॉक के ग्राम कन्हाईबंद के दर्जनों किसान का फसल कोल डिपो के कोयले से उड़ने वाली धूल की वजह से पूरी तहत बर्बाद हो गया हैं. जब मंडी में धान बेचने जाते है तो उनका धान नहीं लिया जाता. मजबूरी में गरीब किसानों को औने-पौने दामों में व्यापारियों के पास बेचना पड़ता हैं. अब किसान अपनी गुहार क्षेत्र के विधायक एवं जिला प्रशासन से कर चुके हैं लेकिन गरीब किसानों का सुनने वाला कोई नहीं. जब इस बात का विरोध किसान कोल डिपो के संचालकों से करते हैं तो उन्हें धमकी मिलती हैं. आपको बता दें कि, जिला प्रशासन कृषि क्षेत्र होने के बावजूद यहां दो कोल डिपो एवं एक कोलवाशरी को यहां संचालन के लिए अनुमति दी हैं. जिसका विरोध करते-करते ग्रामीण किसान थक गए हैं. अब किसानों का कहना है कि ग्राम पंचायत के अनापत्ति के बावजूद कोल डिपो खोला जा रहा हैं. हम जिला प्रशासन से गुहार लगाते-लगाते थक गए हैं, अब उग्र आंदोलन करने मजबूर होंगे.
कन्हाईबंद में कोल डिपो खुलने को लेकर अब किसान लामबंद हो रहे हैं. किसान अब उग्र आंदोलन करने की बात कह रहे हैं. वहीं इससे पहले खुले कोल डिपो का लेकर ग्राम पंचायत ने आपत्ति की थी. अब तीसरा कोल डिपो खुलने जा रहा है इसमें भी ग्राम पंचायत ने कोल डिपो संचालक के प्रस्ताव को खारिज कर दिया. ग्रामीणों का कहना हैं कि इस मामले में विधायक, जिला प्रशासन से लिखित में शिकायत किया गया लेकिन दोनों की चुप्पी समझ से परे हैं. आखिर किसानों की इतने संवेदनशील मामले में क्यों चुप हैं? किसान जानना चाहते हैं.
जब मामला मीडिया के संज्ञान में आया तो किसानों, ग्रामीणों से सीधे मौके पर जाकर हाल चाल जाना. मौके पर जाकर देखने से पता चला कि पटवारी द्वारा गलत प्रतिवेदन बना कर जिला प्रशासन के पास पेश किया हैं. नया खुल रहे कोल डिपो से लगा रिहायशी भवन, तालाब, नहर, मंदिर है. जहां कोल डिपो खुलने से सभी प्रभावित होंगे. बावजूद खनिज विभाग द्वारा उच्च अधिकारियों के गलत प्रतिवेदन के आधार पर अभिमत से दिया हैं. जबकि ग्रामीण किसानों की आपत्ति का प्रतिवेदन में जिक्र ही नहीं हैं. ग्रामीण किसानों की हालात कोल डिपो के धूल से बहुत ही खराब हैं. उनके स्वास्थ्य से लेकर पीने का पानी, निस्तारी तालाब सभी प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन इनका सुनने वाला कोई नहीं हैं. किसानों का कहना है ग्राम पंचायत के अनापत्ति के बाद भी जिला प्रशासन कोल डिपो को खोलने के लिए अभिमत देना नियम विरुद्ध हैं.
जिला प्रशासन एवं विधायक का कहना…
इस मामले में जिला प्रशासन एवं विधायक, ग्रामीण किसानों की बातो को अनसुना कर पूरे मामले को दूसरी ओर डाइवर्ट करना चाह रहे हैं. उनका कहना हैं पहले से दो कोल डिपो है तो एक और खुल जाएगा तो क्या होगा. इसमें मामला कुछ और है, कुछ गांव के लोग अपने स्वार्थ के लिए ग्रामीणों को भड़का रहे हैं जबकि मामला ऐसा नहीं हैं. किसानों की फसल कोल डिपो के धूल से बर्बाद होती है? दूसरा, कोल डिपो से लगा निस्तारी तालाब, मंदिर, रिहायशी घर, नहर हैं, जो कोल डिपो के खुलने से प्रभावित होगी.. और जो ग्रामीण कोल डिपो के खिलाफ शिकायत किए वे भी कन्हाईबंद के ही ग्रामीण हैं.
अब पूरे मामले में ग्रामीण किसानों का कहना है कि फिर एक बार जिला प्रशासन से गुहार लगाएंगे. अगर उनकी बात नहीं सुनी जाएगी तो उग्र आंदोलन करने मजबूर होंगे. कलेक्टर का कहना है कोल डिपो में जमीन डायवर्शन का मामला चल रहा हैं, किसी प्रकार की बात आएगी तो खनिज विभाग का अभिमत निरस्त कर दिया जाएगा.
आपको बता दें कि नवागढ़ ब्लॉक के कन्हाईबंद ग्राम पंचायत द्वारा बिना अनुमति लिए मेसर्स टर्टल सर्विसेस प्रोपाइटर शशांक कुमार सिंह निवासी रामा ग्रीन सरकंडा बिलासपुर द्वारा ग्राम पंचायत कन्हाईबंद में खसरा नंबर 660 रकबा 0.717 हेक्टेयर में खनिज क्षमता 19 हजार एमटी, एवं 1 हजार एमटी अस्थाई अनुज्ञा पत्र के लिए मांग पत्र ग्राम पंचायत कन्हाईबंद में कोल भंडारण के लिए प्राप्त हुआ है. उक्त भूमि में कोल भंडारण के लिए नीरज सिंह पिता सीताराम द्वारा अनापत्ति पत्र की मांग की गई थी. जिसे खारिज कर दिया गया था. बावजूद राजनीति धौंस एवं पहुंच बता कर डिपो का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है. जबकि पूरे मामला न्यायालय में लंबित हैं.
ग्राम वासियों ने जिला प्रशासन से शिकायत किया है कि शशांक कुमार सिंह के द्वारा ग्राम पंचायत कन्हाईबंद, जनपद पंचायत नवागढ़, जिला जांजगीर-चांपा (छ०ग०) के भूमि खसरा नंबर 660/2, 660/5, 660/6, 660/7, 660/8 रकबा 0.717 हेक्टेयर भूमि में खनिज कोयला भण्डारण के लिए अनुमति न दिया जावे. अगर उक्त भूमि पर खनिज कोयला भण्डारण की अनुमति दी जाती है तो हमारे दैनिक व्यवस्था को प्रभावित होगा, पूर्व से ही कोल डिपो, एवं कोल साईडिंग संचालित जिससे भारी वाहनों के चलने से काला धुल हमारे आसपास के क्षेत्रों का वातावरण दूषित हो रहा है. उक्त भूमियों के पास तालाब है जिसमें महिला एवं पुरूष नहाते है, मवेशी पानी पीते है तथा मछली पालन भी किया जाता है. कोयला भण्डारण से पानी और भी प्रदूषित हो जावेगा. उक्त भूमि पर आवागमन का कोई साधन नहीं है. उक्त भूमि के पास कुंआ, मंदिर, तालाब एवं सिंचाई के लिए माइनर भी है. यहां पर एक और कोयला भण्डारण खुल जाने से स्थिति भयावह हो जावेगी.
