जांजगीर चांपा। शहर के थाना चौक मुख्य मार्ग स्थित लगभग 150 वर्ष पुराने लच्छीबंध तालाब को पाटकर दुकानों के निर्माण और बिक्री का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि तहसील प्रशासन की कार्रवाई ने अवैध निर्माण करने वालों को खुली छूट दे दी है।
जानकारी के अनुसार, चांपा नगर के थाना चौक के पास स्थित लच्छीबंध तालाब के करीब 200 फीट हिस्से को पाटकर वहां दुकानों का निर्माण किया गया है। इन दुकानों को बेचे जाने और किराए पर दिए जाने की भी बात सामने आई है। इस संबंध में शहर के रविंद्र मासूलकर ने चांपा तहसीलदार को लिखित शिकायत देकर तालाब को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने तथा अवैध निर्माण हटाने की मांग की थी।
शिकायत के बाद तहसीलदार द्वारा निर्माणकर्ताओं को नोटिस जारी कर कार्य पर अस्थायी रोक लगाई गई थी। हालांकि, कुछ समय बाद तहसीलदार ने उक्त भूमि को निजी बताते हुए निर्माण कार्य को अवैध मानने से इनकार कर दिया। प्रशासन के इस निर्णय के बाद निर्माण कार्य को अप्रत्यक्ष रूप से वैधता मिल गई है, जिससे शहर में चर्चा और असंतोष का माहौल है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लच्छीबंध तालाब का निर्माण लगभग डेढ़ सौ वर्ष पूर्व जमींदार द्वारा जनहित में कराया गया था। सीलिंग प्रक्रिया के दौरान यह शासन अधीन दर्ज नहीं हो सका और वर्तमान में निस्तार पत्रक में इसे निजी तालाब के रूप में दर्ज बताया जा रहा है। आरोप है कि इसी आधार का लाभ उठाकर तालाब को पाटकर उसे व्यवसायिक जमीन में तब्दील किया जा रहा है।
इससे पहले भी समाजसेवी गिरधारी यादव ने तालाब को पाटने के प्रयासों के खिलाफ शिकायत की थी, जिसके बाद निर्माण कार्य पर रोक लगी थी। किंतु समय बीतने के साथ पुनः तालाब के हिस्से को पाटकर दुकानें बना दी गईं और शेष भाग में भी निर्माण की तैयारी की जा रही है।
शिकायतकर्ता रविंद्र मासूलकर का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट एवं नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी तालाब या जल स्रोत को, चाहे वह निजी हो या शासकीय, पाटा नहीं जा सकता। इसके बावजूद तहसील प्रशासन द्वारा निजी भूमि का हवाला देकर निर्माण को वैध ठहराया जाना न्यायालयीन निर्देशों की भावना के विपरीत है।
मामले को लेकर प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ लोगों ने लेन-देन की आशंका भी जताई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अब देखना यह होगा कि शिकायतकर्ता आगे किस स्तर पर इस मामले को उठाते हैं।
फिलहाल, शहर के बीचों-बीच स्थित ऐतिहासिक तालाब की स्थिति को लेकर नागरिकों में चिंता व्याप्त है और पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रशासनिक संवेदनशीलता पर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
