जांजगीर चांपा। नैला रेलवे ओवरब्रिज निर्माण को लेकर जब सर्वे की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, तब विधायक द्वारा धरना प्रदर्शन का ऐलान करना अब जनता के बीच सवालों के घेरे में आ गया है। बीजेपी ने इसे राजनीति चमकाने की सस्ती कोशिश करार देते हुए विधायक पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है।
बीजेपी नेताओं का कहना है कि पांच साल तक कांग्रेस की सरकार रही, लेकिन इस दौरान विधायक ने कभी भी ओवरब्रिज को लेकर कोई धरना या आंदोलन नहीं किया। अब जब काम आगे बढ़ चुका है, तब अचानक धरना देना सिर्फ राजनीतिक ड्रामा हैं।
धरने में नहीं जुट रही भीड़, पार्टी कार्यकर्ता भी बना रहे दूरी.…
सूत्रों के मुताबिक, विधायक के इस रवैए से पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी असहज हैं। हालात यह हैं कि कई वरिष्ठ नेताओं ने खुलकर दूरी बना ली है।
पूर्व में किए गए प्रदर्शन में मात्र 20 से 30 लोग ही जुट पाए, जिससे साफ हो गया कि धरने को जनता का समर्थन नहीं मिला। जिसके कारण एक दिन में ही धरना प्रदर्शन का समाप्त करना पड़ा।
पार्टी की छवि को हो रहा नुकसान…
बीजेपी का कहना है कि इस तरह के गैरज़रूरी आंदोलनों से न सिर्फ जनता भ्रमित हो रही है, बल्कि पार्टी की छवि भी धूमिल हो रही है।
महंत गुट ने भी इस पूरे मामले से दूरी बनाकर यह संकेत दे दिया है कि विधायक का यह कदम व्यक्तिगत राजनीति से प्रेरित है, न कि जनहित से।
बीजेपी का सवाल…
बीजेपी ने विधायक से सवाल किया है कि—
“जब सर्वे का काम शुरू हो चुका है, तब धरने की जरूरत क्या है? क्या जनता के मुद्दों पर आंदोलन करना सिर्फ कैमरे के सामने दिखने का जरिया बन गया है?”
अब देखना होगा कि जनता इस धरना राजनीति को जनहित का संघर्ष मानती है या राजनीतिक नौटंकी।
