जांजगीर चांपा। जिले की पहचान और सांस्कृतिक विरासत माने जाने वाले जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव एवं कृषि एग्री-टेक मेला इस बार अव्यवस्थाओं और प्रशासनिक उदासीनता का शिकार होता नजर आ रहा है। आयोजन से पहले ही महोत्सव पर मानो ग्रहण लग गया है।
सूत्रों के अनुसार, अधिकारी बजट का रोना रोकर अपनी जिम्मेदारियों से बचते दिख रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि अब तक आयोजन को लेकर कोई ठोस रूपरेखा ही तैयार नहीं की गई। हालात यह हैं कि अब तक किसी भी राष्ट्रीय स्तर के कलाकार के आने की कोई लिखित या आधिकारिक संभावना सामने नहीं आई है, जो इस महोत्सव की गरिमा पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
जिस महोत्सव से जिले की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर बननी थी, वह अब केवल कागजी औपचारिकताओं तक सीमित होकर रह गया है। न प्रचार की ठोस योजना, न कलाकारों की सूची, न ही कृषि एग्री-टेक मेले को लेकर किसानों में कोई उत्साह—सब कुछ अधर में लटका हुआ है।
सबसे गंभीर बात यह है कि सत्ताधारी नेताओं की निष्क्रियता ने अधिकारियों को खुली छूट दे दी है। राजनीतिक निगरानी के अभाव में अधिकारियों की मनमानी हावी होती जा रही है, जिसका सीधा खामियाजा जिले की जनता और किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों और सांस्कृतिक संगठनों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का साफ कहना है कि अगर यही हाल रहा तो जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव का ऐतिहासिक स्वरूप पूरी तरह समाप्त हो जाएगा और यह आयोजन सिर्फ नाम का रह जाएगा।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि नींद से जागेंगे? या फिर जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव को यूँ ही अव्यवस्था की भेंट चढ़ा दिया जाएगा?
