जांजगीर चांपा। जिले के प्रभारी एवं प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी से ग्रामीण किसानों और सरपंच प्रतिनिधियों ने मुलाकात कर कान्हाईबंद कोल डिपो के संचालन से उत्पन्न गंभीर समस्याओं से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को लिखित ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि कोल डिपो के कारण ग्रामीणों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। प्रभारी मंत्री ने भी कन्हाईबंद के सरपंच प्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते कार्रवाई के आश्वासन दिए, इस मौके पर सर्किट हाउस में पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल, जिलाध्यक्ष,ग्राम पंचायत के सरपंच, पंच,ग्रामीण किसान सहित जिले के कलेक्टर,एसपी मौजूद थे।
ग्रामीणों ने बताया कि कोयले की आवाजाही से भारी धूल प्रदूषण, सड़कों की बदहाली, कृषि भूमि को नुकसान और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। बच्चों, बुजुर्गों और किसानों को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों और सरपंच प्रतिनिधियों ने बताया कि पंचायत की अनुमति के बिना कोल डिपो चलना पंचायती राज व्यवस्था और सरकारी नियमों का सीधा उल्लंघन है। ग्राम सभा से किसी भी प्रकार की सहमति नहीं ली गई, फिर भी भारी वाहनों की आवाजाही, प्रदूषण और कृषि भूमि को नुकसान लगातार बढ़ता जा रहा है।
सरपंच प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि कोल डिपो संचालन में नियमों की अनदेखी हो रही है और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही से समस्या और गंभीर होती जा रही है। मामले को गंभीरता से सुनते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने ग्रामीणों को कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने की बात कही और कहा कि ग्रामीणों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
आपको बता दें कि, नवागढ़ ब्लॉक के कन्हाईबंद ग्राम पंचायत से अनुमति लिए मेसर्स टर्टल सर्विसेस प्रोपाइटर शशांक कुमार सिंह निवासी रामा ग्रीन सरकंडा बिलासपुर द्वारा ग्राम पंचायत कन्हाईबंद में खसरा नंबर 660 रकबा 0.717 हेक्टेयर में खनिज क्षमता 19 हजार एमटी, एवं 1 हजार एमटी अस्थाई अनुज्ञा पत्र के लिए मांग पत्र कोल भंडारण के लिए दिया गया था. उक्त भूमि में कोल भंडारण के लिए नीरज सिंह पिता सीताराम द्वारा अनापत्ति पत्र की मांग की गई थी. जिसे ग्राम पंचायत ने खारिज कर दिया गया है.पटवारी प्रतिवेदन को छेड़छाड़ कर प्रतिवेदन मे संसोधन कर कोल डिपो को माइनिंग अनुमति दे दिया हैं। जिसका ग्रामीण विरोध कर रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि आश्वासन के बाद प्रशासन कब और कैसी ठोस कार्रवाई करता है, या फिर कान्हाईबंद कोल डिपो की समस्या यूं ही ग्रामीणों पर भारी पड़ती रहेगी।
