जांजगीर चांपा। किसान से धोखाधड़ी मामले में जेल में बंद जैजैपुर विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक बालेश्वर साहू को न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें 50 हजार रुपये के मुचलके पर सशर्त जमानत मंजूर कर ली है। जमानत आदेश जारी होने के बाद विधायक साहू को आज जिला जेल से रिहा कर दिया गया है। गौरतलब है कि इससे पहले विधायक बालेश्वर साहू को 22 जनवरी तक न्यायिक रिमांड पर भेजा गया था। जमानत मिलने के बाद अब उन्हें राहत मिली है। जमानत मिलने की खबर पर उनके समर्थक भारी संख्या में जेल परिसर पर जमा होना शुरू हो गए। जेल से बाहर आने के बाद अपने हाथ में संविधान की किताब और बाबा साहब की तस्वीर लेकर लहराते दिखे। जेल से बाहर आने के बाद समर्थकों में खुशी की लहर थी।
क्या है आगे की प्रक्रिया…
विधायक को जमानत मिलने के बाद, कोर्ट के आदेश पर उसे रिहा कर दिया जाता है, लेकिन उसे जमानत की शर्तों (जैसे नियमित रूप से रिपोर्ट करना, गवाहों को धमकाना नहीं) का पालन करना होता है; पुलिस जांच पूरी करती है, चार्जशीट दाखिल करती है, और यदि पर्याप्त सबूत नहीं हैं तो आरोपी को बरी कर सकती है, अन्यथा कोर्ट में सुनवाई जारी रहती है, जहाँ आरोपी को पेश होना पड़ता है, और शर्तों का उल्लंघन करने पर गिरफ्तारी और जेल हो सकती है।
जमानत (Bail) मिलने के बाद व्यक्ति को जेल से रिहा कर दिया जाता है, लेकिन यह अंतिम सज़ा नहीं होती; यह केवल मुकदमे (Trial) के दौरान व्यक्ति की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए एक व्यवस्था है, जिसके बाद व्यक्ति को अदालत की सभी सुनवाई में हाजिर रहना होता है, और अगर वह शर्तों का उल्लंघन करता है, तो उसकी जमानत रद्द हो सकती है और उसे वापस जेल भेजा जा सकता है, और सज़ा होने के बाद भी ऊपरी अदालत (High Court) में अपील के साथ ज़मानत (Appeal Bail) के लिए आवेदन किया जा सकता है, ताकि सज़ा पूरी होने से पहले वह बाहर रह सके, लेकिन यह अदालत के फैसले पर निर्भर करता है।
कोर्ट की प्रक्रिया…
जमानत आदेश और शर्तें: कोर्ट जमानत आदेश जारी करता है, जिसमें आरोपी को रिहा करने की शर्तें होती हैं (जैसे मुचलका भरना, नियमित रूप से पुलिस को रिपोर्ट करना, गवाहों से संपर्क न करना)।
रिहाई: जेल प्रशासन को कोर्ट का आदेश मिलता है, और आरोपी शर्तों के अनुसार रिहा हो जाता है (इसमें कुछ समय लग सकता है)।
जांच और चार्जशीट: पुलिस जांच जारी रखती है। यदि पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो पुलिस कोर्ट में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल करती है।
सुनवाई: चार्जशीट के बाद, कोर्ट में सुनवाई शुरू होती है, जहाँ गवाहों की गवाही होती है और आरोपी के वकील अपना पक्ष रखते हैं।
निर्णय: अंत में, कोर्ट मामले की सुनवाई के बाद आरोपी को दोषी या निर्दोष करार देती है।
पुलिस की भूमिका:…
जांच: जमानत के बाद भी पुलिस अपनी जांच जारी रखती है। अगर सबूत मिलते हैं, तो चार्जशीट दाखिल करती है।
शर्तों का पालन करवाना: पुलिस उन शर्तों की निगरानी करती है जो कोर्ट ने जमानत के लिए लगाई हैं।
गिरफ्तारी (यदि आवश्यक हो): यदि आरोपी जमानत की शर्तों का उल्लंघन करता है (जैसे गवाहों को डराना, भागने की कोशिश करना, या नए अपराध करना), तो पुलिस उसे दोबारा गिरफ्तार कर सकती है और कोर्ट में पेश कर सकती है।
आरोपी की जिम्मेदारी:…
कोर्ट द्वारा तय की गई सभी शर्तों का पालन करना।
सुनवाई की तारीख पर कोर्ट में उपस्थित होना।
जांच में बाधा न डालना या सबूतों के साथ छेड़छाड़ न करना।
