जांजगीर चांपा। छत्तीसगढ़ के 31 जिलों में विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा आर.डी.एस.एस. योजना के तहत लगभग 2750 करोड़ रुपये की लागत से कार्य कराया गया। इस योजना के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा बिजली चोरी रोकने एवं ट्रांसमिशन लॉस कम करने के लिए ए.बी. केबल बिछाने का प्रावधान था, लेकिन चांपा प्रोजेक्ट डिवीजन में यह कार्य 30 प्रतिशत भी पूरा नहीं हो सका।
सूत्रों की माने तो इसी दौरान गंभीर शिकायतें सामने आईं, जिनमें आरोप लगाया गया कि प्रोजेक्ट ऑफिस चांपा के अधिकारियों ने ठेकेदार से मिलीभगत कर गुणवत्ताहीन एवं बिना मानक केबल का उपयोग कराया। केबल पर आवश्यक मानक अंकित नहीं थे और घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया।
सूत्रों के अनुसार इस घोटाले में चांपा डिविजन के बड़े अधिकारीयो सहित अन्य की संलिप्तता सामने आई है। चांपा प्रोजेक्ट डिवीजन में लगभग 132 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है, जिससे न केवल बिजली बोर्ड को भारी आर्थिक क्षति हुई, बल्कि बिजली कंपनी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि मामले में जांच एवं कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई गई और प्रकरण को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। कार्यपालन यंत्री एच.के. मंगेश्कर को निलंबित कर अंबिकापुर अटैच किया गया, जबकि कथित रूप से प्रमुख भूमिका निभाने वाले अधिकारी को अभयदान दे दिया गया. बताया जा रहा कि उनकी रिश्तेदारी नेताओं से है। जिसके कारण उसे बचा लिया गया हैं।
नियमानुसार किसी भी परियोजना की फाइल सहायक यंत्री से होकर कार्यपालन यंत्री तक जाती है, ऐसे में केवल एक अधिकारी पर कार्रवाई करना कई सवाल खड़े करता है। आरोप है कि कुछ अधिकारी से पैसों के लेन-देन के चलते उन्हें बचा लिया गया है।
सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि ठेकेदार एवं संबंधित अधिकारियों द्वारा मोटी रकम मुख्यालय रायपुर में उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई गई है । स्थानीय नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे प्रकरण की शिकायत मुख्यमंत्री से कर उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
