जांजगीर चांपा। नवागढ़ ब्लॉक के ग्राम कन्हाईबंद में खुल रहे नये कोल डिपो के विरोध में ग्रामीण अब लामबंद हो गए हैं। खुलकर अब कोल डिपो का विरोध करना शुरू कर दिए हैं। ग्रामीणों के विरोध का खबर जब मीडिया में आया तो कोल डिपो संचालक तिलमिला कर मीडिया को ही माध्यम बनाकर सफाई देने लगा। लेकिन ग्रामीणों ने साफ का दिया हैं अब गांव के आसपास नया कोई कोल डिपो नहीं खोलने दिया जाएगा। क्योंकि कोल डिपो के प्रदूषण से उनको शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा हैं। कोल डिपो की वजह से रोड एक्सीडेंट से लोगो की जान जा रही है। लेकिन कोल संचालक अपने मनमानी पर उतर आया है।
ग्रामीणों के आपत्ति के बावजूद मौके पर काम शुरू कर दिया है. वही पूरे मामले में जिला प्रशासन अनजान बनी हुई है.आने वाला समय कही कोल डिपो संचालक के मनमानी के वजह से ग्रामीण आक्रोशित ना हो जाए. तब इसकी जिम्मेदारी कोल डिपो संचालक की होगी। वही ग्रामीणों का कहना है कि उनकी शिकायत सुनने वाला कोई नहीं है. स्थानीय नेता अंजान बन कर कोल डिपो संचालक की मदद कर रहा है. ग्रामीणों का कहना है आने वाला चुनाव में जरूर इसका हिसाब लिया जाएगा।
आपको बता दें कि नवागढ़ ब्लॉक के कन्हाईबंद ग्राम पंचायत द्वारा बिना अनुमति लिए मेसर्स टर्टल सर्विसेस प्रोपाइटर शशांक कुमार सिंह निवासी रामा ग्रीन सरकंडा बिलासपुर द्वारा ग्राम पंचायत कन्हाईबंद में खसरा नंबर 660 रकबा 0.717 हेक्टेयर में खनिज क्षमता 19 हजार एमटी, एवं 1 हजार एमटी अस्थाई अनुज्ञा पत्र के लिए मांग पत्र ग्राम पंचायत कन्हाईबंद में कोल भंडारण के लिए प्राप्त हुआ है। उक्त भूमि में कोल भंडारण के लिए नीरज सिंह पिता सीताराम द्वारा अनापत्ति पत्र की मांग की गई थी। जिसे खारिज कर दिया गया था। बाउजूद राजनीति धौंस एवं पहुंच पता कर डिपो का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। जबकि पूरे मामला न्यायालय में लंबित हैं।
ग्राम वासियों ने जिला प्रशासन से शिकायत किया है कि शशांक कुमार सिंह के द्वारा ग्राम पंचायत कन्हाईबंद, जनपद पंचायत नवागढ़, जिला जांजगीर-चांपा (छ०ग०) के भूमि खसरा नंबर 660/2, 660/5, 660/6, 660/7, 660/8 रकबा 0.717 हेक्टेयर भूमि में खनिज कोयला भण्डारण के लिए अनुमति न दिया जावे। अगर उक्त भूमि पर खनिज कोयला भण्डारण की अनुमति दी जाती है तो हमारे दैनिक व्यवस्था को प्रभावित होगा, पूर्व से ही कोल डिपो, एवं कोल साईडिंग संचालित जिससे भारी वाहनों के चलने से काला धुल हमारे आसपास के क्षेत्रों का वरण दूषित डो रहा है। उक्त भूमियों के पास तालाब है जिसमें महिला एवं पुरूष नहाते है, मवेशी पानी पीते है तथा मछली पालन भी किया जाता है। कोयला भण्डारण से पानी और भी प्रदूषित हो जावेगा। उक्त भूमि पर आवागमन का कोई साधन नहीं है। उक्त भूमि के पास कुंआ, मंदिर, तालाब एवं सिंचाई के लिए माइनर भी है। यहां पर एक और कोयला भण्डारण खुल जाने से स्थिति भयावह हो जावेगी।
