रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया है कि राज्य की पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान इस सिंडिकेट से जुटाए गए 860 से 880 करोड़ रुपये नकद रायपुर स्थित कांग्रेस मुख्यालय ‘राजीव भवन’ पहुंचाए गए थे। केंद्रीय एजेंसी ने आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2019 से 2023 के दौरान शराब सिंडिकेट ने आबकारी विभाग और छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) पर कब्जा जमाकर 2,883 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की थी।
जांच एजेंसी के अनुसार, अवैध शराब कारोबार से जुटाए गए भारी-भरकम कैश का प्रबंधन लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल संभालता था। वरिष्ठ नेता रामगोपाल अग्रवाल के निर्देश पर सिंडिकेट के सहयोगी इस रकम को बोरियों व बैगों में भरकर शंकर नगर स्थित राजीव भवन ले जाते थे। वहां यह नकदी रामगोपाल अग्रवाल के अधीन कार्यरत अकाउंटेंट देवेंद्र डडसेना को सौंपी जाती थी। ईडी का आरोप है कि मुख्यालय भेजी गई कुल रकम में से करीब 72 करोड़ रुपये सीधे रामगोपाल अग्रवाल के व्यक्तिगत नियंत्रण में थे, जिसे उन्हीं के निर्देशों पर खर्च, निवेश अथवा वितरित किया गया। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि जब्त डिजिटल साक्ष्य, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स और प्रमुख गवाहों के बयानों से इस पूरे लेन-देन की पुष्टि होती है।
शराब घोटाले में अगस्त 2026 से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद रामगोपाल अग्रवाल की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। ईडी ने उन्हें 9 अक्टूबर 2026 को 147 करोड़ रुपये के कथित कस्टम चावल मिलिंग घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में भी गिरफ्तार किया था, जहां अदालत ने उन्हें 5 दिनों की ईडी रिमांड पर सौंपा है। इस बीच, एजेंसी ने 10 अक्टूबर को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत कार्रवाई करते हुए रायपुर के अनुपम नगर और कटोरा तालाब स्थित अग्रवाल के दो पॉश फ्लैट्स को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है, जिनकी कुल अनुमानित कीमत 9.06 करोड़ रुपये है। इसके साथ ही शराब घोटाला मामले में ईडी द्वारा अब तक अटैच या फ्रीज की गई संपत्तियों का कुल मूल्य बढ़कर 610.34 करोड़ रुपये पहुंच गया है।
