जांजगीर-चांपा। जिले की कानून व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर की कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाली कोतवाली में ही यदि फरियादियों की शिकायत दर्ज कराने में परेशानी हो, तो आम आदमी न्याय के लिए आखिर कहां जाए? स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं की ओर से कोतवाली प्रभारी की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कई मामलों में शिकायत लेकर पहुंचने के बाद भी उन्हें तत्काल कार्रवाई या शिकायत दर्ज कराने के लिए भटकना पड़ता है। दूसरी ओर शहर में असामाजिक तत्वों के बढ़ते हौसले भी पुलिसिंग पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
सबसे गंभीर आरोप शहर में नशे के कथित खुले कारोबार को लेकर हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि कोतवाली के आसपास ही गांजा और अवैध शराब की बिक्री की चर्चा आम है। सवाल यह है कि यदि पुलिस थाना और उसके आसपास ऐसी गतिविधियां चलने की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि कहीं पुलिस की सेटिंग के कारण तो कार्रवाई नहीं रुक रही? ऐसे में पुलिस प्रशासन के लिए जरूरी है कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करे।
पुलिस भक्ति में मग्न… गुंडे-बदमाश अपराध करने में मस्त
शहर में इन दिनों कानून व्यवस्था को लेकर लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हैं। एक ओर पुलिस धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन संभालने में व्यस्त नजर आ रही है, तो दूसरी ओर अपराध और असामाजिक गतिविधियों को लेकर पुलिस की सक्रियता पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शहर में शराब, गांजा, जुआ, सट्टा, धमकी अन्य संदिग्ध गतिविधियों की शिकायतें सामने आने के बावजूद कार्यवाई नहीं दिखाई दे रही है। फरियादी शिकायत लेकर थाने पहुंचते हैं, लेकिन शिकायतों पर कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
इधर, पुलिस की प्राथमिकताओं को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। पुलिस भक्ति में मग्न है और गुंडे-बदमाश अपराध करने में मस्त! यह तंज अब शहर की कानून व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
