जांजगीर-चांपा। “मैं जागरूक हूं, साइबर क्राइम से मुक्त हूं…” पुलिस के इस साइबर जागरूकता अभियान के सेल्फी फ्रेम में तस्वीरें खूब सज रही हैं। लेकिन इसी तस्वीर के ठीक दूसरी तरफ साइबर ठगी का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस के पूरे जागरूकता अभियान की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विडंबना देखिए पुलिस लोगों को OTP शेयर नहीं करने, APK लिंक पर क्लिक नहीं करने और अनजान WhatsApp वीडियो कॉल से सावधान रहने का संदेश दे रही है, वहीं जिले में कथित तौर पर जिंदल स्टील की एजेंसी दिलाने के नाम पर 4 लाख 64 हजार रुपए की ठगी का मामला सामने आया है।
शिकायतकर्ता के मुताबिक रकम RTGS के जरिए खाते में जमा कराई गई और बाद में मामला संदिग्ध नजर आया।और इस मामले में शिकायतकर्ता का संबंध जिला पंचायत सदस्य राजकुमार साहू के भाई से बताया जा रहा है। यानी सवाल सिर्फ एक व्यक्ति के साथ हुई कथित ठगी का नहीं, बल्कि उस जागरूकता अभियान की प्रभावशीलता का भी है, जिस पर पुलिस लाखों लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाने का दावा करती है।
5 माह बाद भी न आरोपी पकड़ में आए, न ही राशि वापस….
दो बार के जिला पंचायत सदस्य राजकुमार साहू कहना हैं कि साइबर ठगी के एक मामले में छह माह बीतने के बाद भी न तो आरोपी पुलिस की पकड़ में आया और न ही ठगी गई 4.64 लाख रुपए की राशि वापस मिल सकी है। भाजपा के दो बार जिला पंचायत सदस्य रहे राजकुमार साहू का आरोप है कि उन्होंने एसपी से लेकर आईजी तक कई बार शिकायत की और मामले में एफआईआर भी दर्ज कराई, लेकिन अब तक पुलिस जांच किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंची है।
राजकुमार साहू का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद आरोपी तक पुलिस नहीं पहुंच पाई और रकम भी वापस नहीं मिली। उन्होंने कहा कि अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर भरोसा उठने लगा है। एक ओर पुलिस साइबर जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को ठगी से बचने का संदेश दे रही है, वहीं दूसरी ओर छह महीने पुराने मामले में कार्रवाई का परिणाम सामने नहीं आना अभियान की जमीनी प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है।
सेल्फी में जागरूकता, ठगों के सामने बेबसी…?
पुलिस का सेल्फी फ्रेम कहता है “मैं जागरूक हूं, साइबर क्राइम से मुक्त हूं।”लेकिन जमीन पर सवाल यह है कि क्या सिर्फ सेल्फी लेने से साइबर अपराध रुकेंगे?
अगर कोई व्यक्ति कंपनी की एजेंसी के नाम पर लाखों रुपए गंवा देता है, तो क्या जागरूकता अभियान सिर्फ फोटो खिंचाने और सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित रह गया है? पुलिस को अब यह भी बताना होगा कि ऐसे फर्जी कॉल, मोबाइल नंबर, बैंक खाते और डिजिटल लेन-देन के पीछे बैठे लोगों तक कार्रवाई कब पहुंचती है।
‘एक सेल्फी’ से आगे कब बढ़ेगा अभियान?
साइबर अपराधी रोज नए तरीके ईजाद कर रहे हैं और ठगी की रकम लाखों में पहुंच रही है। ऐसे में पुलिस का अभियान केवल फ्रेम, पोस्टर और सेल्फी तक दिखाई देना पर्याप्त नहीं है। जरूरत है कि जागरूकता के साथ-साथ ठगी के मामलों में तेज जांच, रकम फ्रीज कराने की कार्रवाई और आरोपियों तक पहुंचने का ठोस परिणाम भी जनता को दिखाई दे। क्योंकि जनता को अब सेल्फी नहीं, साइबर ठगों की गिरफ्तारी चाहिए।
