अम्बिकापुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस का तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आज से संभाग मुख्यालय अम्बिकापुर में आयोजित होने जा रहा है। इस प्रशिक्षण शिविर को संगठन सृजन अभियान का नाम दिया गया है। प्रशिक्षण शिविर में सरगुजा संभाग के 6 जिलों के 49 ब्लॉक अध्यक्ष शामिल होंगे। वही प्रशिक्षण शिविर में पीसीसी चीफ दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव सहित कांग्रेस के बड़े नेता शामिल होंगे। इधर यह अटकलें भी तेज हो गई है कि कांग्रेस से निष्कासित रामानुजगंज के पूर्व विधायक बृहस्पत सिंह की घर वापसी हो सकती है। हालांकि इस पर अब तक औपचारिक पुष्टि नहीं हो पायी हो पायी है, लेकिन राजनीति में अटकलों और संभावनाओं का दौर कभी खत्म नहीं होती। यही वजह है की कोई जादुई करिश्मा कभी भी कही भी किसी के साथ भी हो सकता है।
प्रदेश की सत्ता खोने के बाद यह पहली दफा है कि कांग्रेस के तमाम दिग्गज एक साथ सरगुजा में इकट्ठे हो रहे है। 15 से 17 सितंबर तक आयोजित संगठन सृजन अभियान की शुरुआत आज से होने जा रही है। इस प्रशिक्षण में ब्लॉक से लेकर बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने की रणनीति है। प्रशिक्षण शिविर में 12 अलग-अलग सत्र होंगे। प्रशिक्षण के लिए मास्टर ट्रेनर भी होंगे। बता दें कि, उत्तर छत्तीसगढ़ के सरगुजा में संगठन विस्तार के बाद पार्टी पदाधिकारियों में जो नारागजी और खेमे बाजी के आरोप लग रहे थे। आशा है की उस पर अब कुछ समय के लिए विराम लगेगा।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल प्रशिक्षण शिविर में तो शामिल होंगे ही, इसके अलावा उनका बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ का दौरा भी है। वे टीएस सिंहदेव के गुट के माने जाने वाले कांग्रेस नेता महेश्वर पैकरा के निजी कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे। इधर इस शेड्यूल के सामने आते ही सियासी फिज़ा भी कैसे शांत रहेगी, तो अटकले तेज हो गई है कि कांग्रेस से निष्कासित नेता बृहस्पत सिंह से भूपेश बघेल की मुलाकात हो सकती है और सबकुछ ठीक रहा तो बृहस्पत एक बार फिर कांग्रेस के हो सकते है।
हालियां दिनों में बृहस्पत सिंह के जनसंपर्क अभियान को अगर नजरअंदाज ना किया जाए, तो हो सकता है बृहस्पत सिंह अभी से फील्ड में एक बार फिर अपनी पकड़ बनाने की कवायद में जुट गए है और हो सकता है कि उन्हें आलाकमान की क्लीनचिट भी मिल गई हो। खैर यह सब संभावनाएं मात्र है, लेकिन बृहस्पत सिंह से टीएस सिंहदेव की दूरी जगजाहिर है और यह सरगुजा है। यहां हज़ूर ही सब कुछ है। ऐसे में क्या संभव है और क्या नहीं? कुछ कह पाना थोड़ा मुश्किल है, पर यह साफ है कि भूपेश और बृहस्पत की एक मुलाकात।
बहरहाल, सियासत में जादुई करिश्मा होते रहता है और हो सकता है फिर कोई करिश्मा देखने को मिले। लगभग विपक्ष विहिन हो चुके बलरामपुर जिले के साथ भी कुछ ऐसा ही हो और तगड़े धरना प्रदर्शन, आंदोलन फिर देखने को मिले।
