जांजगीर-चांपा। जिले में कोटवारी सेवा भूमि के कथित फर्जीवाड़े का मामला अब विधानसभा तक पहुंच गया है। विधायक व्यास कश्यप ने विधानसभा में ध्यानाकर्षण सूचना क्रमांक-74 के माध्यम से आरोप लगाया है कि जांजगीर तहसील के ग्राम बिरगहनी( च) के आश्रित ग्राम घुटिया की भूमि खसरा नंबर 369 रकबा 0.6190 हे.कोटवारी सेवा भूमि के रूप में ग्राम कोटवार श्याम दास के नाम पर दर्ज था, उसकी मृत्यु के उपरांत सन 2021-22 के राजस्व रिकॉर्ड में यह भूमि श्याम दास की पत्नी तथा वर्तमान कोटवार समरीन बाई के नाम दर्ज है। कुछ समय पूर्व राजस्व विभाग के पोर्टल में यह भूमि चाम्पा निवासी एवं जिला भाजपा के उपाध्यक्ष लक्ष्मी चंद देवांगन पिता जगन्नाथ प्रसाद देवगन के नाम पर दर्ज दिख रहा था।
लक्ष्मी चंद्र देवागन के द्वारा उक्त भूमि को मुकेश बंसल पिता सागरमल बंसल व दो अन्य भू स्वामी को बेच दिया गया है। वर्तमान में यह भूमि राजस्व विभाग के पोर्टल में अपेक्स रियलिटी मुकेश बंसल पिता सागरमल बंसल व दो अन्य भू स्वामी के नाम पर दिख रहा है।
शासन की नियमों के अनुसार कोटवारी सेवा भूमि की खरीदी बिक्री नहीं की जा सकती, किंतु उपरोक्त प्रकरण में जिम्मेदार अधिकारियों के द्वारा शासन की नियमों को ताक में रखकर रजिस्ट्री एवं नामांतरण किया गया है। इस पूरे मामले ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ध्यानाकर्षण सूचना के अनुसार, खसरा नंबर 369 रकबा 0.6190 हेक्टेयर भूमि पहले कोटवार श्यामदास के नाम सेवा भूमि के रूप में दर्ज थी। उनकी मृत्यु के बाद भूमि उनकी पत्नी एवं वर्तमान कोटवार के नाम दर्ज होना चाहिए था, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में यह भूमि अन्य व्यक्तियों के नाम दर्ज होकर बेच दी गई। वर्तमान में यह भूमि निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज होने का उल्लेख किया गया है।
विधायक ने आरोप लगाया कि शासन के नियमों के अनुसार कोटवारी सेवा भूमि की खरीद-बिक्री नहीं की जा सकती, फिर भी जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से रजिस्ट्री और नामांतरण कर दिया गया। मामले की शिकायत अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) और जिला दंडाधिकारी से किए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ध्यानाकर्षण सूचना में यह भी कहा गया है कि यदि पूरे जिले में कोटवारी सेवा भूमि और शासकीय भूमि की रजिस्ट्रियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई बड़े फर्जीवाड़ों का खुलासा हो सकता है। आरोप है कि भू-माफियाओं पर कार्रवाई नहीं होने से उनके हौसले बुलंद हैं और आम जनता का शासन-प्रशासन से भरोसा उठता जा रहा है।
अब विधानसभा में मामला उठने के बाद यह देखना होगा कि सरकार दोषी अधिकारियों और कथित भू-माफियाओं पर क्या कार्रवाई करती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
