फटाफट डेस्क। अयोध्या के राम मंदिर और उत्तराखंड के बदरीनाथ धाम में चढ़ावे व दान की चोरी के आरोपों ने देशभर के मंदिर प्रशासनों को चौकन्ना कर दिया है। धार्मिक स्थलों पर पारदर्शिता को लेकर छिड़ी राष्ट्रव्यापी बहस के बीच हरिद्वार के विश्व प्रसिद्ध मां मनसा देवी मंदिर ने एक बेहद अनोखी और सख्त पहल की है। मंदिर प्रशासन ने यहां तैनात सभी पुजारियों और कर्मचारियों के लिए ‘नो पॉकेट’ (बिना जेब वाले) कुर्ते पहनना अनिवार्य कर दिया है। बुधवार से लागू हुई इस व्यवस्था का सीधा मकसद दान-पुण्य की व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और संदेह से परे रखना है।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी ने इस फैसले की पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए बताया कि हालिया विवादों को देखते हुए कुछ दिन पहले ही यह रणनीति तैयार कर ली गई थी। इस नियम को अमलीजामा पहनाने से पहले मंदिर के सभी पुजारियों और कर्मचारियों को पूरी ईमानदारी से सेवा करने की बकायदा शपथ भी दिलाई गई थी। महंत रविंद्रपुरी के मुताबिक, अगर कपड़ों में जेब ही नहीं होगी, तो चढ़ावे की रकम को छिपाकर रखने की गुंजाइश ही खत्म हो जाएगी। उन्होंने बेबाकी से कहा कि चंद लोगों की गलतियों का खामियाजा पूरे मंदिर प्रबंधन और सनातन धर्म की छवि को भुगतना पड़ता है; ऐसे में श्रद्धालुओं की आस्था और भरोसे को बचाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
तकनीक और सुरक्षा के मोर्चे पर भी मंदिर प्रशासन कोई ढिलाई नहीं बरत रहा है। वर्तमान में पूरे मनसा देवी मंदिर परिसर में 65 हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे इंस्टॉल किए गए हैं, जिनके जरिए मुख्य कार्यालय से चप्पे-चप्पे पर पैनी नजर रखी जा रही है। ट्रस्ट का संकल्प है कि भक्तों द्वारा चढ़ाए गए एक-एक रुपये का सही हिसाब रहे और हर दानकर्ता को उसकी रसीद मिले। राहत की बात यह है कि मंदिर के पुजारियों और स्टाफ ने इस फैसले का विरोध करने के बजाय प्रबंधन का पूरा सहयोग किया है। वहीं, दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालुओं ने भी इस कड़े कदम की सराहना करते हुए कहा है कि ऐसे ईमानदार प्रयासों से व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास और ज्यादा मजबूत होगा।
