रायपुर। देश के कई हिस्सों में जहां मानसून झमाझम बरस रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बादलों ने पूरी तरह से ब्रेक लगा दिया है। पिछले एक सप्ताह से बारिश का सिलसिला थमा होने के कारण शहर में गर्मी और चिपचिपी उमस का ग्राफ तेजी से ऊपर भागा है। तेज धूप और हवा में भारी नमी के इस दोहरे वार ने स्थानीय लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। कल सोमवार को रायपुर का अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा, जिसने जुलाई के महीने में भी मई-जून जैसी चुभन का अहसास करा दिया।
मौसम विभाग ने आज मंगलवार, 14 जुलाई को भी रायपुर में भारी बारिश की संभावना नहीं जताई है। आज भी आसमान मुख्य रूप से साफ रहने और अधिकतम तापमान 35 डिग्री जबकि न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों ने एक राहत भरी खबर भी साझा की है। बुधवार, 15 जुलाई और गुरुवार, 16 जुलाई से प्रदेश में एक बार फिर मानसून की गतिविधियां रफ्तार पकड़ सकती हैं, जिससे लोगों को इस तपिश से निजात मिलने की उम्मीद है।
राजधानी में बीते 4 और 5 जुलाई को हुई मूसलाधार बारिश के बाद से मानसून अचानक सुस्त पड़ गया। पिछले पांच दिनों से तो शहर में राहत की एक बूंद तक नहीं टपकी है। बारिश न होने के बावजूद वातावरण में आर्द्रता (नमी) का स्तर काफी ऊंचा है, जिसके चलते पसीना सूखने का नाम नहीं ले रहा है। सुबह की शुरुआत होते ही तीखी धूप सड़कों को तपाने लगती है, जिससे दोपहर होते-होते बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर सन्नाटा पसरने लगा है। राहगीरों को गर्मी से बचने के लिए पेड़ों और छतरियों की छांव का सहारा लेना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस मौसम को लेकर नागरिकों को आगाह किया है। हवा में अत्यधिक नमी होने के कारण शरीर का तापमान संतुलित नहीं हो पा रहा है और सामान्य से कहीं ज्यादा पसीना बह रहा है। ऐसी स्थिति में थकान, कमजोरी और डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। डॉक्टरों ने लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और धूप में निकलते समय सावधानी बरतने की सलाह दी है।
केवल रायपुर ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में फिलहाल मानसून की चाल बेहद धीमी बनी हुई है। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के अधिकांश जिलों में कोई उल्लेखनीय वर्षा दर्ज नहीं की गई है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में इस समय कोई भी मजबूत और सक्रिय मौसमी सिस्टम नहीं बना हुआ है। इसी स्थानीय गतिरोध के कारण हवाओं का रुख बदला है और बादलों की आवाजाही थम सी गई है।
राहत की बात यह है कि यह इंतजार अब खत्म होने वाला है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 15 जुलाई के आसपास बंगाल की खाड़ी में एक नया निम्न दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) आकार ले सकता है। यदि यह सिस्टम अपेक्षित रूप से मजबूत होता है, तो इसके प्रभाव से रायपुर समेत छत्तीसगढ़ के अधिकांश हिस्सों में झमाझम बारिश का नया दौर शुरू हो जाएगा, जो तपते छत्तीसगढ़ को एक बार फिर से सराबोर कर देगा।
