रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा दिन आज भारी हंगामेदार होने के आसार हैं। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस आज सदन में विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करने जा रही है। राज्य गठन के बाद छत्तीसगढ़ विधानसभा के इतिहास में लाया जाने वाला यह 10वां अविश्वास प्रस्ताव है। विपक्ष का नेतृत्व कर रहे नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि वर्तमान भाजपा सरकार के प्रति जनता और विपक्ष दोनों का भरोसा पूरी तरह खत्म हो चुका है। गौरतलब है कि पिछले दिनों हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में ही इस अविश्वास प्रस्ताव को लाने की रणनीति पर मुहर लगा दी गई थी।
इस अविश्वास प्रस्ताव के जरिए विपक्ष सरकार को चौतरफा घेरने की तैयारी में है। प्रश्नकाल के दौरान जल जीवन मिशन में गड़बड़ी, राजधानी रायपुर की पेयजल व्यवस्था, लगातार होती औद्योगिक दुर्घटनाएं, शराब दुकानों का संचालन, सरकारी आयोजनों में हुआ फिजूलखर्च और प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों पर सरकार से सीधे जवाब मांगा जाएगा। इसके अतिरिक्त, नवा रायपुर के नकटी गांव में गरीबों के आशियानों पर चली बुलडोजर कार्रवाई को लेकर कांग्रेस स्थगन प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। कानून-व्यवस्था की बदहाली, प्रदेश में गहराते बिजली संकट, हाल ही में बढ़ाई गई बिजली दरों, उर्वरक-बीज की किल्लत और सरसों की सरकारी खरीदी समय से पहले बंद होने से किसानों को हुए नुकसान पर भी सदन में तीखी बहस होना तय है। साथ ही, कोयला खनन के लिए हसदेव अरण्य क्षेत्र में हो रही वनों की अंधाधुंध कटाई का मुद्दा भी विपक्ष प्रमुखता से उठाएगा।
हालांकि, सदन के वर्तमान गणित को देखें तो संख्या बल पूरी तरह सत्ताधारी दल भाजपा के पक्ष में नजर आता है। 90 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 54 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 35 और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के पास एक विधायक हैं। छत्तीसगढ़ विधानसभा के इतिहास पर नजर डालें तो अब तक आए सभी 9 अविश्वास प्रस्तावों पर लंबी बहस तो हुई, लेकिन हर बार तत्कालीन सरकारें अपना बहुमत साबित करने में सफल रहीं। पहली विधानसभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के खिलाफ भाजपा दो बार (2002 और 2003 में) अविश्वास प्रस्ताव लाई थी। इसके बाद डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में कांग्रेस ने कुल पांच बार (2007, 2011, 2015, 2017 और 2018) यह प्रस्ताव पेश किया। वहीं, पिछली भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ भाजपा ने दो बार (2022 और 2023) अविश्वास प्रस्ताव लाकर घेराबंदी की थी। इतिहास गवाह है कि आज तक कोई भी अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हो सका है, लेकिन आज होने वाली बहस राजनीतिक रूप से बेहद सरगर्म रहने वाली है।
