रायपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित प्लेस ऑफ सेफ्टी (विशेष गृह) में सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए चार विधि-विरुद्ध बालकों द्वारा सुरक्षाकर्मी (चौकीदार) की बेरहमी से हत्या कर फरार होने की एक बेहद सनसनीखेज वारदात सामने आई है। 13 जुलाई 2026 को हुई इस गंभीर घटना के बाद राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने तत्काल संज्ञान लिया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सोमवार की शाम को ही डॉ. शर्मा की अध्यक्षता में एक आपातकालीन ऑनलाइन समीक्षा बैठक बुलाई गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में बिलासपुर के जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ), जिला बाल संरक्षण अधिकारी (डीसीपीओ), विशेष किशोर पुलिस इकाई (एसजेपीयू) के अधिकारी और प्लेस ऑफ सेफ्टी के अधीक्षक सहित कई जिम्मेदार प्रशासनिक अफसर शामिल हुए।
बैठक की शुरुआत में ही आयोग की अध्यक्ष ने सुरक्षा में हुई इस भारी चूक पर सख्त नाराजगी जाहिर की। दरअसल, डॉ. वर्णिका शर्मा ने बीते 6 दिसंबर 2025 को इसी बाल देखरेख संस्था का औचक निरीक्षण किया था। उस दौरान बच्चों के आवास, भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य और स्टाफ की कमी जैसी गंभीर खामियां पाई गई थीं, जिन्हें दुरुस्त करने के समयबद्ध निर्देश दिए गए थे। सोमवार की बैठक में डॉ. शर्मा ने पूर्व में दिए गए उन निर्देशों के पालन की कड़ाई से समीक्षा की और अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि निरीक्षण में चिह्नित कमियों के निराकरण की अद्यतन स्थिति का गंभीरता से परीक्षण किया जाए और संस्था की सुरक्षा व्यवस्था का पुनर्मूल्यांकन कर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
फरार बालकों की धरपकड़ के लिए आयोग ने पुलिस प्रशासन को भी मुस्तैद कर दिया है। बैठक में मौजूद बिलासपुर एसजेपीयू की अधिकारी रश्मीत कौर को डॉ. शर्मा ने निर्देशित किया कि फरार हुए चारों बच्चों के संबंध में उपलब्ध समस्त जानकारी, उनके संभावित निवास स्थान और संपर्क सूत्रों को तुरंत खंगाला जाए। इसके साथ ही विभिन्न संबंधित विभागों के आपसी समन्वय से एक विशेष टीम गठित कर त्वरित और प्रभावी खोज अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि इन बालकों को जल्द से जल्द सुरक्षित रूप से ढूंढा जा सके।
प्रशासनिक जवाबदेही तय करते हुए आयोग की अध्यक्ष ने बिलासपुर जेजेबी सदस्य कुंती, डीपीओ और डीसीपीओ सत्यनारायण राठौर को सख्त लहजे में हिदायत दी कि इस प्रकार के गंभीर मामलों में शासन को केवल मौखिक रूप से जानकारी देना नाकाफी है। अब से हर एक कार्रवाई का विधिवत लिखित पत्राचार होना अनिवार्य होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आपातकालीन स्थिति में अधिकारी भले ही उन्हें 24 घंटे में कभी भी फोन पर सूचित कर सकते हैं, लेकिन उसके तुरंत बाद मामले का आधिकारिक लिखित प्रतिवेदन और पत्राचार हर हाल में किया जाना चाहिए।
इस घटना के बाद आयोग महज बैठकों तक सीमित नहीं है, बल्कि जवाबदेही तय करने के लिए एक औपचारिक पत्र भी जारी कर रहा है। ऑनलाइन बैठक के बावजूद आयोग द्वारा संबंधित अधिकारियों से एक विस्तृत रिपोर्ट तलब की जाएगी। इस प्रतिवेदन में संस्था की स्वीकृत क्षमता, वर्तमान में वहां रह रहे बच्चों की संख्या, तैनात काउंसलरों की योग्यता व कार्यप्रणाली, बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए उपलब्ध काउंसलिंग व्यवस्था, पूर्व में किए गए सुरक्षा सुधारों और इस घटना के बाद की गई त्वरित कार्रवाई व भविष्य की कार्ययोजना का स्पष्ट व तथ्यात्मक ब्यौरा देना होगा।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि बाल सुधार गृहों में बच्चों की सुरक्षा, उनके मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास की जिम्मेदारी से कोई भी विभाग पल्ला नहीं झाड़ सकता। डॉ. शर्मा ने विशेष रूप से निर्देश दिए कि प्रत्येक प्रकरण की सुनवाई के दौरान बच्चों की मनोदशा और मानसिक स्वास्थ्य का गंभीरता से आकलन किया जाए। संस्था में बच्चों की संख्या के अनुपात में पर्याप्त काउंसलर होने चाहिए ताकि उन्हें समय पर मनोसामाजिक परामर्श मिल सके। बैठक के समापन पर उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि फरार बच्चों की तलाश और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की नियमित समीक्षा होगी, क्योंकि बाल देखरेख संस्थाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और संवेदनशील कार्यप्रणाली सुनिश्चित करना सभी विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
