जशपुर। अपनी अनूठी जलवायु और उपजाऊ मिट्टी के लिए मशहूर जशपुर जिले के कृषि इतिहास में एक नया और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। यहाँ पारंपरिक खेती के ढर्रे से बाहर निकलकर अब नकदी फसलों (कैश क्रॉप्स) का दायरा तेजी से बढ़ रहा है, जिससे स्थानीय किसानों में एक नया उत्साह देखा जा रहा है। इसी कड़ी में जिले में पहली बार पिपरमिंट की व्यावसायिक खेती की शुरुआत की गई है, जो क्षेत्र के कृषि परिदृश्य में किसी बड़ी क्रांति से कम नहीं है। इस आधुनिक और अनूठी खेती की कमान सौगड़ा आश्रम ने संभाली है, जिसके तत्वाधान में पहली बार प्रयोग के तौर पर 5 एकड़ भूमि में पिपरमिंट की फसल लहलहा रही है। आश्रम की इस दूरदर्शी पहल का मुख्य उद्देश्य स्थानीय किसानों को आधुनिक, कम लागत और अधिक मुनाफा देने वाली खेती से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
इस अनूठी खेती के तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं की बात करें तो यह किसानों के लिए बेहद किफायती साबित होने वाली है। सौगड़ा आश्रम के मानस सिंह के मुताबिक, पिपरमिंट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके पौधों को मवेशी नुकसान नहीं पहुँचाते, जिससे किसानों को खेत की फेंसिंग या घेराबंदी करने के भारी-भरकम खर्च से मुक्ति मिल जाती है। समय की बचत के लिहाज से भी यह फसल बेजोड़ है, क्योंकि यह महज 3 महीने यानी 90 दिनों में पूरी तरह कटाई के लिए तैयार हो जाती है। सबसे खास बात यह है कि इस पौधे में ‘शून्य बर्बादी’ (Zero Waste) का सिद्धांत लागू होता है; इसके तने से लेकर पत्तियों तक, हर एक हिस्सा किसी न किसी रूप में उपयोग में आता है, जिससे किसानों को घाटा होने की गुंजाइश न के बराबर रहती है।
बाजार की मांग के लिहाज से पिपरमिंट एक ऐसी बहुउपयोगी फसल है जिसकी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बारहों महीने भारी मांग रहती है। इसका उपयोग बड़े पैमाने पर जीवन रक्षक दवाओं, कफ सिरप, पेन किलर बाम और विभिन्न आयुर्वेदिक औषधियों को बनाने में होता है। इसके अलावा ब्यूटी और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में भी साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट, माउथवॉश और फेसमास्क जैसे प्रोडक्ट्स के लिए पिपरमिंट अनिवार्य रूप से इस्तेमाल किया जाता है। फसल तैयार होने के बाद जहां एक तरफ वैज्ञानिक विधि से पौधों से कीमती तेल (मेन्था ऑयल) निकाला जाएगा, वहीं इसके सूखे पत्तों को भी बाजार में अच्छे दामों पर बेचा जा सकेगा। यानी जशपुर के किसानों के लिए यह फसल ‘आम के आम और गुठलियों के दाम’ वाली बात साबित होने जा रही है।
जशपुर की धरती पर हुआ यह आधुनिक प्रयोग आने वाले दिनों में यहाँ के किसानों की तकदीर और तस्वीर दोनों बदलने की पूरी ताकत रखता है, यही वजह है कि सौगड़ा आश्रम के इस सराहनीय प्रयास की अब पूरे जिले में जमकर तारीफ हो रही है।
