नई दिल्ली। भारतीय विमानन क्षेत्र ने तकनीक और सुरक्षा के मोर्चे पर एक बेहद ऐतिहासिक छलांग लगाई है। देश में दुर्गम, दूरस्थ और सामरिक रूप से संवेदनशील इलाकों में हेलीकॉप्टर सेवाओं को हर मौसम में सुरक्षित और सुलभ बनाने के लिए पहली प्राइवेट ‘प्वाइंट-इन-स्पेस’ (PinS) इंस्ट्रूमेंट अप्रोच प्रक्रिया को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा बुधवार रात की गई इस घोषणा के मुताबिक, आंध्र प्रदेश के उंडावल्ली हेलीपोर्ट को इस आधुनिक प्रणाली के परिचालन के लिए चुना गया है, जो भारतीय नागरिक उड्डयन के इतिहास में एक नए युग का सूत्रपात है।
इस बेहद महत्वाकांक्षी तकनीक को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) द्वारा विकसित किया गया है, जिसे नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के वैश्विक मानकों के अनुरूप अपनी हरी झंडी दी है। इस अनूठी तकनीक की महत्ता को रेखांकित करते हुए नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि देश की पहली पिन-एस इंस्ट्रूमेंट अप्रोच प्रक्रिया की शुरुआत हेलीकॉप्टर परिचालन के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम है। इससे न केवल उड़ान सुरक्षा और परिचालन दक्षता बढ़ेगी, बल्कि खराब से खराब मौसम में भी हेलीकॉप्टरों की सुगमता और पहुंच में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
यह सफलता भारत के उस बड़े विज़न का हिस्सा है जिसके तहत देश के विमानन ढांचे को पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक बनाया जा रहा है। विमानन मंत्री ने हाल ही में हुए एक और मील के पत्थर का जिक्र करते हुए बताया कि पिछले सप्ताह ही एक वाणिज्यिक विमान द्वारा देश के पहले स्वदेशी ‘गगन’ (GAGAN) आधारित प्रिसिजन अप्रोच का सफल प्रदर्शन किया गया था। इस कड़ी में प्वाइंट-इन-स्पेस प्रक्रिया का जुड़ना सरकार के परफॉर्मेंस-बेस्ड नेविगेशन (PBN) और स्वदेशी उपग्रह-आधारित तकनीकों के विस्तार के संकल्प को और मजबूती देता है, जिससे भारतीय एविएशन इकोसिस्टम को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मानकों के समकक्ष खड़ा किया जा सके।
सरकार की प्राथमिकता अब देश भर में हेलीकॉप्टर कनेक्टिविटी को अधिक भरोसेमंद और आम लोगों के लिए सुलभ बनाना है। अत्याधुनिक तकनीकी अवसंरचना के सफल प्रयोग का उदाहरण देते हुए नागरिक उड्डयन मंत्री ने बताया कि इसी उन्नत तकनीक के सहयोग से इस वर्ष की चारधाम हेलीकॉप्टर सेवा के पहले चरण को बिना किसी अप्रिय घटना के पूरी सुरक्षा के साथ संपन्न किया गया है। यह अनुभव साबित करता है कि भारत अब वैश्विक स्तर के तकनीक-संचालित हेलीकॉप्टर पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए पूरी तरह तैयार है।
उंडावल्ली हेलीपोर्ट से शुरू हुई यह अनूठी पहल आने वाले समय में पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल बनने जा रही है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय को उम्मीद है कि इस मंजूरी के बाद भारत के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह की प्रणालियों के विकास का रास्ता साफ होगा। भविष्य में इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं (Air Ambulance), आपदा राहत अभियानों, पर्यटन, समुद्र तटीय (ऑफशोर) गतिविधियों, तीर्थयात्राओं और क्षेत्रीय हवाई संपर्क (Regional Connectivity) को मिलेगा। इंस्ट्रूमेंट फ्लाइट रूल्स (IFR) के तहत काम करने वाली यह प्रणाली प्रतिकूल मौसम के व्यवधानों को न्यूनतम कर देश के कोने-कोने को हवाई मार्ग से सुरक्षित जोड़ेगी।
